रायपुर हेल्थ डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर के साथ हुई मोबाइल चोरी की घटना ने एक बड़े ऑनलाइन ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. निधि खालरे 13 जनवरी को समता एक्सप्रेस से दिल्ली से रायपुर पहुंचीं। सुबह करीब 5:30 बजे रेलवे स्टेशन उतरने के बाद वे ऑटो से समता कॉलोनी स्थित अपने निवास पहुंचीं।
घर पहुंचने के कुछ समय बाद, करीब 7 बजे जब उन्होंने अपने पिट्ठू बैग की साइड पॉकेट जांची, तो उनका मोबाइल फोन गायब मिला। घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने में मोबाइल गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई और संबंधित सिम को बंद करा दिया।
कुछ दिनों बाद उन्होंने नया मोबाइल लेकर उसी नंबर की डुप्लीकेट सिम दोबारा चालू कराई। इसी दौरान 16 जनवरी को उनके मोबाइल पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से खाते से 5 हजार रुपये डेबिट होने का मैसेज आया। इस अनजान ट्रांजैक्शन से उन्हें ठगी का संदेह हुआ।
इसके बाद वे कचहरी स्थित बैंक शाखा पहुंचीं और खाते का विस्तृत स्टेटमेंट निकलवाया। स्टेटमेंट की जांच में पता चला कि उनके खाते से यूपीआई के माध्यम से कुल 2 लाख 26 हजार 562 रुपये निकाले जा चुके हैं। इससे स्पष्ट हो गया कि मोबाइल चोरी के बाद ठगों ने डिजिटल तरीके से उनके बैंक खाते तक पहुंच बना ली थी।
मामले की जांच में जुटी पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए यूपीआई अकाउंट ट्रेस किया और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी का नाम आयुष डागा बताया गया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 70 हजार रुपये भी बरामद किए हैं। वहीं, इस ठगी में शामिल उसका एक साथी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी आयुष डागा कोई नया अपराधी नहीं है। उस पर पहले भी चोरी के करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं और वह रायपुर के कबीर नगर, पुरानी बस्ती, कोतवाली समेत मध्यप्रदेश के ग्वालियर, महाराष्ट्र के गोंदिया और ओडिशा में जेल जा चुका है।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच जारी है। यह मामला डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है कि मोबाइल चोरी के बाद बैंकिंग और यूपीआई सेवाओं को लेकर तत्काल सतर्कता बरतना कितना जरूरी है।
