रायपुर। छत्तीसगढ़िया किसान समाज द्वारा शुरू की गई “अस्मिता रथयात्रा” राज्य में सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान के आंदोलन के रूप में उभर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य समाज में व्याप्त भेदभाव, असमानता और शोषण के खिलाफ संगठित आवाज़ खड़ी करना है। संगठन के सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक समाज भेदभाव की मानसिकता से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक समानता और न्याय की कल्पना अधूरी रहेगी।
रथयात्रा के माध्यम से गांव-गांव, शहर-शहर लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि किसान, श्रमिक और कमजोर वर्ग केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि समाज की असली ताकत हैं। यात्रा के दौरान सामाजिक एकता, छत्तीसगढ़ी अस्मिता, सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा को लेकर जनसंवाद किया जा रहा है।
संगठन का कहना है कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन की शुरुआत है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में शोषण के खिलाफ एक मजबूत जनआंदोलन का रूप ले सकती है। युवाओं, महिलाओं और किसानों की भागीदारी से यह अभियान जनआधारित बनता जा रहा है, जिससे सामाजिक बदलाव की उम्मीद और मजबूत हुई है।
