छत्तीसगढ़ के कोड़ागांव जिले में नेशनल हाईवे-30 पर एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। तेज रफ्तार ट्रक और कार की आमने-सामने की टक्कर में एक युवा डॉक्टर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा इतना भयावह था कि कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और प्लास्टिक की बोतल की तरह चिपककर सिकुड़ गई। दुर्घटना की भयावहता ने यह साफ कर दिया कि टक्कर की तीव्रता कितनी अधिक रही होगी।
मृतक की पहचान डॉक्टर राजू भगत (33 वर्ष) के रूप में हुई है, जो रायगढ़ के निवासी थे और सुकमा स्थित छिंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में सेवाएं दे रहे थे। रविवार देर रात वे रायगढ़ से छिंदगढ़ लौट रहे थे और कार में अकेले सफर कर रहे थे। इसी दौरान कोड़ागांव क्षेत्र के गारका गांव के पास उनकी कार की तेज रफ्तार ट्रक से आमने-सामने भिड़ंत हो गई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डॉक्टर की कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई और वे वाहन के अंदर ही बुरी तरह फंस गए। हादसे के बाद नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई और कुछ समय के लिए लंबा जाम लग गया। सूचना मिलते ही केशकाल थाना क्षेत्र की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद कार का दरवाजा काटकर डॉक्टर के शव को बाहर निकाला गया।
पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त दोनों वाहनों को सड़क किनारे हटवाया गया, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका। हादसे के आरोपी ट्रक चालक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसे डॉक्टर की असमय मौत है, जो दुर्गम आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे थे। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि तेज रफ्तार, लापरवाही और सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस तरह की भयावह कीमत वसूलती है। एक जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील समाज के रूप में यह आवश्यक है कि सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए, ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
