रायपुर: राजधानी में दोपहिया वाहन चोरी की घटनाएं हर साल एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शहर में प्रतिवर्ष एक हजार से अधिक मोटरसाइकिल चोरी के मामले दर्ज हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इस बढ़ते अपराध ग्राफ को देखते हुए पुलिस कमिश्नरी ने अब तकनीक आधारित नई रणनीति लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत एक विशेष स्पेशल टास्क टीम का गठन किया गया है, जो केवल बाइक चोरी और वाहन संबंधी अपराधों पर फोकस करेगी।
इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अलर्ट सिस्टम है। जैसे ही किसी थाने में बाइक चोरी की शिकायत दर्ज होगी, उसी समय पुलिस कंट्रोल रूम, पेट्रोलिंग यूनिट और संबंधित थानों को स्वतः डिजिटल अलर्ट भेजा जाएगा। इससे पुलिस की प्रतिक्रिया समय में कमी आएगी और शुरुआती घंटों में ही नाकेबंदी एवं तलाशी अभियान तेज किया जा सकेगा।
एआई तकनीक शहरभर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम और डेटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध वाहनों व व्यक्तियों की पहचान करेगी। चोरी की वारदात के समय, लोकेशन और पैटर्न का विश्लेषण कर संभावित हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे, जिससे पुलिस उन इलाकों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे अपराधियों के नेटवर्क और उनके काम करने के तरीकों का पता लगाना आसान होगा।
स्पेशल टीम में साइबर एक्सपर्ट, तकनीकी विश्लेषक और अनुभवी पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है। टीम को आधुनिक उपकरणों और सॉफ्टवेयर से लैस किया गया है ताकि वे रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित जांच कर सकें। पुलिस का लक्ष्य केवल चोरी की घटनाओं को कम करना ही नहीं, बल्कि चोरी हुए वाहनों की रिकवरी रेट बढ़ाना भी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पारंपरिक जांच पद्धतियों के साथ जब आधुनिक तकनीक जुड़ती है तो परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। यह पहल शहर में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
