जशपुर जिले में शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और कार्यसंस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से कड़ा रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग मामलों में सख्त कार्रवाई की है। विभाग का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि विद्यालयी व्यवस्था में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। हाल ही में एक शिक्षक के लंबे समय तक बिना सूचना और अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का मामला सामने आया, जिस पर विभागीय जांच के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला डांगडीह में पदस्थ शिक्षक रजत कुमार तिर्की 7 अक्टूबर 2025 से लगातार विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए। विभागीय रिकॉर्ड में न तो अवकाश का कोई आवेदन दर्ज था और न ही अनुपस्थिति की कोई पूर्व सूचना दी गई थी। इस दौरान स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग को भी उनकी ओर से कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। करीब तीन माह तक ड्यूटी से गायब रहने के बाद जब 13 जनवरी को शिक्षक पुनः विद्यालय पहुंचे, तब तक मामला विभागीय जांच के दायरे में आ चुका था। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच कर प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा गया, जिसके आधार पर इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
इसी क्रम में एक अन्य मामले में कार्यालयीन समय के दौरान शराब का सेवन कर स्कूल पहुंचने वाले एक लिपिक पर भी विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया। यह घटना शिक्षा व्यवस्था की गरिमा और विद्यार्थियों के सामने अनुचित आचरण का उदाहरण मानी गई, जिस पर तत्काल संज्ञान लिया गया।
इन दोनों घटनाओं ने शिक्षा विभाग को यह संदेश देने का अवसर दिया है कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों से जिम्मेदारी, समयपालन और नैतिक आचरण की अपेक्षा सर्वोपरि है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई को अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, ताकि विद्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और कार्यकुशलता बनी रहे।
