तेहरान/तेल अवीव/वॉशिंगटन।मध्य पूर्व में तनाव ने खुली जंग का रूप ले लिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के कई ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए। इन हमलों में एक गर्ल्स स्कूल के निशाने पर आने से कम से कम 40 छात्राओं की मौत की खबर है, जबकि दर्जनों घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक हमले ईरान के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को लक्ष्य बनाकर किए गए। अमेरिका और इज़राइल का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान की बढ़ती सैन्य और मिसाइल क्षमताओं को रोकने के उद्देश्य से की गई। हालांकि ईरान ने इसे खुली आक्रामकता करार देते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईरान का पलटवार
हमलों के कुछ घंटों के भीतर ही ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें कुछ मिसाइलें कतर और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में भी बताई जा रही हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार कुछ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
खाड़ी देशों में आपात हालात
तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी देशों ने एहतियातन अपने एयरस्पेस आंशिक रूप से बंद कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिर हालात से गुजर रहा है, ऐसे में यह सैन्य टकराव हालात को और जटिल बना सकता है।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें आने वाले 24 घंटों पर टिकी हैं।
