रायपुर, 16 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में धान खरीदी, सहकारी समितियों के खर्च, धान की रीसाइक्लिंग और भंडारण व्यवस्था का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार से इस विषय पर सवाल करते हुए किसानों को हुए नुकसान पर जवाब मांगा।
कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव ने सदन में कहा कि कई स्थानों पर धान का समय पर उठाव नहीं होने के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि धान की रीसाइक्लिंग जैसी गड़बड़ियां सामने आई थीं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सरकार ने क्या कार्रवाई की। यादव ने विशेष रूप से सक्ती जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लगभग 30 करोड़ रुपये के धान को चूहों द्वारा खराब किए जाने की बात सामने आई है, जो भंडारण व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
इस पर जवाब देते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि राज्य में इस सीजन में कुल 47.41 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से 44.25 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव भी किया जा चुका है। मंत्री के अनुसार वर्तमान में लगभग 3 लाख मीट्रिक टन धान शेष है, जिसे मार्च के पहले सप्ताह तक उठा लिया जाएगा।
हालांकि इस दौरान सूखत और चूहों द्वारा धान खराब होने के मुद्दे पर भी सवाल उठे। रामकुमार यादव ने कहा कि कई जगहों पर उचित भंडारण व्यवस्था नहीं होने के कारण धान को नुकसान हो रहा है और इसकी जिम्मेदारी केवल समितियों पर डालना उचित नहीं होगा।
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी इस मामले को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने जवाब में यह स्वीकार किया है कि धान की रीसाइक्लिंग हो रही थी, जिसके कारण धान खरीदी को रोकना पड़ा। इससे कई किसान समय पर अपना धान नहीं बेच पाए। महंत ने अनुमान जताया कि करीब 600 करोड़ रुपये का धान किसानों द्वारा नहीं बेचा जा सका, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी मांग की कि धान खरीदी केंद्रों में किसानों से अलग-अलग मदों में जो राशि ली जाती है, उसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि खरीदी केंद्रों पर सूचना बोर्ड लगाकर यह जानकारी प्रदर्शित की जाए, ताकि किसानों को स्पष्ट रूप से पता चल सके कि उनसे किस मद में कितनी राशि ली जा रही है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष से धान खरीदी केंद्रों में सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों के माध्यम से किसानों से ली जाने वाली राशि और संबंधित मदों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा।
