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October 21, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

डीएमएफ घोटाले में दो अफसर जेल भेजे गए, कोर्ट ने दिखाई सख्ती, फरार क्लर्क पर कसा शिकंजा

देश और समाज के विकास के लिए सरकार द्वारा बनाए गए फंड और योजनाओं का सही उपयोग होना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन जब इन फंड्स में गड़बड़ियां सामने आती हैं तो यह जनता के विश्वास को गहरा आघात पहुँचाती हैं। दंतेवाड़ा जिले का चर्चित डीएमएफ (जिला खनिज फाउंडेशन) घोटाला इसका बड़ा उदाहरण है, जिसमें प्रशासनिक अफसर भी लिप्त पाए गए।

मुख्य घटना:

आदिवासी विकास विभाग में पदस्थ रहे दो पूर्व सहायक आयुक्त, डॉ. आनंद जी सिंह और के.एस. मसराम को कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई और उन्हें 15 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। यह फैसला न्यायपालिका की सख्ती और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

फरार आरोपी:

इस घोटाले में क्लर्क संजय कौडपी का नाम भी सामने आया है। लेकिन वह अभी तक फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार प्रयासरत है। माना जा रहा है कि उसके गिरफ्त में आने के बाद मामले के और भी राज़ खुल सकते हैं।

महत्व और असर:

डीएमएफ फंड आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत विकास के लिए बनाया गया था। जब ऐसे फंड्स का दुरुपयोग होता है, तो समाज के सबसे कमजोर तबके का नुकसान होता है। इसीलिए इस घोटाले में अदालत की सख्ती समाज को यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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