राजधानी रायपुर के मुक्तांगन में आयोजित साहित्य उत्सव उस समय विवादों में आ गया, जब कार्यक्रम व्यवस्था को लेकर एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वायरल ऑडियो में प्रसिद्ध अभिनेता मनोज जोशी कथित तौर पर आयोजन की अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सुनाई दे रहे हैं। मामला तब का बताया जा रहा है जब वे अपने चर्चित नाटक ‘चाणक्य’ के मंचन से पहले दोपहर 12 बजे कार्यक्रम स्थल पर मंच व्यवस्था देखने पहुंचे थे।
ऑडियो के अनुसार, अभिनेता ने यह आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या आयोजक मौजूद नहीं था, जो उन्हें मंच, एंट्री व्यवस्था और कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दे सके। कथित बातचीत में वे यह कहते सुनाई देते हैं कि मंच पर कोई उपस्थित नहीं है, आयोजनकर्ता नजर नहीं आ रहे हैं और न ही कोई अधिकृत व्यक्ति जिम्मेदारी लेने को तैयार है। इससे नाराज होकर उन्होंने आयोजकों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और असंतोष व्यक्त किया।
वायरल ऑडियो में यह भी उल्लेख है कि आयोजन स्थल पर थर्ड पर्सन द्वारा खाना और भुगतान की व्यवस्था तो कर दी गई, लेकिन कार्यक्रम प्रबंधन से जुड़ा कोई अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद नहीं था, जिससे कलाकार और टीम को असुविधा हुई। अभिनेता द्वारा यह भी कहा गया कि यदि यह शूटिंग का सेट होता, तो इस तरह की अव्यवस्था कभी स्वीकार नहीं की जाती।
हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर आयोजकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से ऑडियो की पुष्टि नहीं की है। जनसंपर्क विभाग और संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है और वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि साहित्य उत्सव के पहले दिन शाम 7 बजे प्रसिद्ध अभिनेता मनोज जोशी द्वारा नाटक ‘चाणक्य’ का भव्य मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, लेखक, कवि और बुद्धिजीवी शामिल हुए हैं। बावजूद इसके, इस वायरल ऑडियो ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं और कार्यक्रम प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर चर्चा का विषय बना दिया है।
