जम्मू : जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में माता वैष्णो देवी धाम के यात्रा मार्ग पर मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे हुए भीषण भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। अर्धकुमारी मंदिर के पास इंद्रप्रस्थ भोजनालय के निकट हुए इस हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बुधवार को 32 तक पहुंच गया। कई लोग अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है, जबकि कुछ लापता हैं। सेना, एनडीआरएफ, और स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन भारी बारिश ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
हादसे का मंजर: चश्मदीदों की जुबानी
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर और मलबा गिरने लगा। एक चश्मदीद ने कहा, “हम भोजनालय के पास रुके थे, तभी जोरदार आवाज के साथ पत्थर गिरने शुरू हुए। सब कुछ सेकंडों में तबाह हो गया। लोग चीख रहे थे, लेकिन कुछ नहीं कर सकते थे।” हादसे में फंसे यात्रियों में से कई को कटरा के नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लापता यात्रियों की तलाश जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लापता लोगों में राजस्थान के धौलपुर और आगरा के तीन युवक शामिल हैं, जो मंदिर से लौटते वक्त किशनपुर-डोमेल रोड पर भूस्खलन की चपेट में आ गए। इनमें यश गर्ग, प्रांशु मित्तल, और शिव बंसल के नाम सामने आए हैं। दो अन्य युवकों ने पेड़ पकड़कर अपनी जान बचाई। परिवारों में शोक की लहर है, और प्रशासन लापता लोगों की तलाश में जुटा है।
भारी बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
मंगलवार को जम्मू में 6 घंटे में 22 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण कई नदियां, जैसे तवी और चिनाब, खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जम्मू-कटरा हाईवे बंद है, और 22 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। भूस्खलन के कारण यात्रा मार्ग पर बना लोहे का ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में और भारी बारिश की चेतावनी दी है।
प्रशासन और सरकार का रुख
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात कर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम साफ होने तक यात्रा स्थगित करने की अपील की है।
