पश्चिम बंगाल विधानसभा का सत्र एक बार फिर गरमा गया। सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के विधायकों के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिली। स्थिति इतनी बिगड़ी कि भाजपा के मुख्य सचेतक को मार्शलों की मदद से बाहर निकालना पड़ा। बताया जाता है कि धक्का-मुक्की के दौरान वे बेहोश हो गए और उन्हें तुरंत उपचार के लिए ले जाया गया।
अव्यवस्था और हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के तीन विधायकों को निलंबित कर दिया। इस फैसले से विपक्षी खेमे में नाराजगी और बढ़ गई। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया और राज्य सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए सदन में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने “मोदी चोर” और “वोट चोर” के नारे लगाकर माहौल को और गरमा दिया। उनका आरोप था कि भाजपा चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने का काम कर रही है और जनता के जनादेश का सम्मान नहीं करती।
इस घटनाक्रम ने न केवल राज्य विधानसभा की कार्यवाही को बाधित किया, बल्कि एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि बंगाल की राजनीति केंद्र और राज्य के बीच टकराव और कटुता का प्रतीक बन गई है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखना अब दोनों पक्षों के लिए बड़ी चुनौती है।
