तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव दक्षिण भारत की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लंबे समय से इस राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास कर रही है। पार्टी के बड़े नेता लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को चुनावी तौर पर सशक्त बनाने में जुटे हैं। भाजपा का उद्देश्य है कि वह इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करके राज्य की राजनीति में अपनी जगह बनाए।
लेकिन इन तैयारियों के बीच एनडीए को एक बड़ा झटका लगा है। अन्नाद्रमुक से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले टीटीवी दिनाकरन ने एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी अब भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी। दिनाकरन ने इस फैसले का कारण बताते हुए कहा कि वे भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से उम्मीद कर रहे थे कि एआईएडीएमके के आंतरिक विवाद पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
दिनाकरन के इस कदम से भाजपा और एनडीए की चुनावी रणनीति पर सीधा असर पड़ना तय है। तमिलनाडु की राजनीति में छोटे-छोटे दल भी बड़े परिणाम तय करते हैं। ऐसे में एक सहयोगी दल का अलग होना भाजपा की योजनाओं के लिए चुनौती साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु का चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। जहां भाजपा पूरे दमखम से चुनाव की तैयारियों में जुटी है, वहीं गठबंधन की इस टूटन से उसके सामने नए सिरे से रणनीति बनाने की मजबूरी आ खड़ी हुई है।
