September 6, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

NHM में 60% से अधिक संविदा कर्मचारी, 75,000 मितानिन और 16,000 NHM कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप

छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत करीब 16,000 संविदा कर्मचारी और 75,000 मितानिन (सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) 18 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को गहरे संकट में डाल दिया है। NHM कर्मचारियों की हड़ताल के कारण टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। मितानिन, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, भी इस आंदोलन में शामिल हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

हड़ताल का कारण

NHM कर्मचारी और मितानिन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा न निकलने के कारण उन्होंने हड़ताल का रास्ता चुना। उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  • नियमितीकरण: संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग, जो 15-20 साल से सेवा दे रहे हैं।
  • वेतन और ग्रेड पे: नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और ग्रेड पे की मांग।
  • पारदर्शी प्रदर्शन मूल्यांकन: कर्मचारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन में पारदर्शिता और निष्पक्षता।
  • महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश: मातृत्व और अन्य विशेष अवकाश की सुविधा।
  • EPF और स्वास्थ्य बीमा: संविदा कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि और स्वास्थ्य बीमा की मांग।

छत्तीसगढ़ NHM कर्मचारी संघ के महासचिव कौशलेश तिवारी ने बताया कि उन्होंने सरकार को 160 से अधिक ज्ञापन सौंपे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव
  • टीकाकरण प्रभावित: हड़ताल के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण कार्यक्रम लगभग ठप हो गया है। बिलासपुर के CMHO डॉ. शुभा गरेवाल ने दावा किया कि नियमित कर्मचारियों के सहारे टीकाकरण जारी है, लेकिन भीड़ होने पर मरीजों को अगले दिन लौटने को कहा जा रहा है।
  • अस्पतालों पर बोझ: NHM कर्मचारियों की अनुपस्थिति से नियमित कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या उन्हें वापस लौटाया जा रहा है।
  • मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं: गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल में कमी आई है। मितानिन की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हैं।
  • नियमित सेवाएं रुकीं: OPD (बाह्य रोगी विभाग), टीबी, कुष्ठ रोग, कैंसर, डायबिटीज, और उच्च रक्तचाप की जांच जैसी सेवाएं बाधित हैं।
सरकार का रुख

छत्तीसगढ़ सरकार ने हड़ताल को “जनहित के खिलाफ और पूरी तरह अनुचित” करार दिया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने सभी जिला मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHOs) को निर्देश दिया है कि 18 अगस्त से अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन न दिया जाए। इसके साथ ही, अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी भी शामिल है, की चेतावनी दी गई है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि NHM कर्मचारियों का नियमितीकरण केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करता है। उन्होंने “नो वर्क, नो पे” नीति को लागू करने की बात दोहराई।

मितानिन की भूमिका

मितानिन छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, और जागरूकता अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उनकी हड़ताल से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। मितानिन की मांगों में नियमित वेतन, बेहतर कार्य सुविधाएं, और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।

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