छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर चल रहा नक्सल विरोधी ऑपरेशन भारत के इतिहास में सबसे बड़े और तकनीकी रूप से उन्नत अभियानों में से एक है। बीजापुर जिले के करेगुट्टा, नडपल्ली, और पुजारी कांकेर पहाड़ी क्षेत्रों में केंद्रित इस ऑपरेशन में 5000 से 10,000 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना के ग्रे हाउंड्स, CRPF की कोबरा बटालियन, DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), STF (स्पेशल टास्क फोर्स), और महाराष्ट्र की C-60 यूनिट शामिल हैं। यह अभियान नक्सलियों की कुख्यात PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर 1 और 2 को निशाना बनाकर चलाया जा रहा है, जो दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) का हिस्सा है।
ऑपरेशन की रणनीति और AI का उपयोग
- हाईटेक तकनीक: इस ऑपरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग खुफिया जानकारी को विश्लेषण करने, नक्सलियों की गतिविधियों को ट्रैक करने, और उनकी रणनीति को समझने में किया जा रहा है। ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए नक्सलियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा, साइबर इंटेलिजेंस और नार्को-टेररिज्म से जुड़ी जानकारियों का भी उपयोग हो रहा है।
- सुरक्षा बलों की तैनाती: करेगुट्टा पहाड़ियों को चारों ओर से घेर लिया गया है, जिससे नक्सलियों के लिए भागने का कोई रास्ता नहीं बचा है। जवानों ने इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है, और रुक-रुककर गोलीबारी जारी है।
- IEDs की चुनौती: नक्सलियों ने क्षेत्र में 100 से अधिक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IEDs) बिछाए हैं, जिसके कारण सुरक्षा बल अत्यंत सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अब तक 100 से अधिक IEDs को निष्क्रिय किया जा चुका है।
मुख्य टारगेट: हिड़मा और 43 मोस्ट वांटेड
- माड़वी हिड़मा: नक्सलियों का सबसे खूंखार कमांडर, जिसके नेतृत्व में PLGA बटालियन नंबर 1 सक्रिय है। हिड़मा पर कई बड़े हमलों का आरोप है, और उसे पकड़ने या मारने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। उसे “सरेंडर करो वरना मरो” का पत्र भेजा गया है।
- 43 नक्सलियों की लिस्ट: सुरक्षा बलों ने 43 मोस्ट वांटेड नक्सलियों की सूची तैयार की है, जिसमें छत्तीसगढ़ के 25, तेलंगाना के 4, आंध्रप्रदेश के 5, कर्नाटक के 2, ओडिशा के 3, और झारखंड के 4 नक्सली शामिल हैं। इस सूची में मुपल्ला लक्ष्मण राव, मलोजुल्ला, मिशिर बेसरा, और थिप्पारी तिरुपति जैसे बड़े नक्सली नेता शामिल हैं, जो बस्तर और आसपास के इलाकों में नक्सल गतिविधियों को संचालित करते हैं।
- देवा और अन्य कमांडर: हिड़मा के साथ-साथ बटालियन चीफ देवा, विकास, और अन्य डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) भी इस ऑपरेशन के निशाने पर हैं।
ऑपरेशन की प्रगति
- नक्सलियों की स्थिति: खबरों के अनुसार, नक्सलियों के पास राशन और मेडिकल सुविधाओं की कमी हो गई है। घने जंगलों और पहाड़ियों में फंसे होने के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो रही है। सूत्रों का कहना है कि वे जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकते हैं या मुठभेड़ में मारे जा सकते हैं।
- सुरक्षा बलों की सफलता: अब तक 5-6 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है, जबकि दो जवान घायल हुए हैं। ऑपरेशन में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं।
- समयावधि: यह ऑपरेशन 48 से 80 घंटे से अधिक समय तक चल चुका है, और दोनों पक्षों के बीच रुक-रुककर गोलीबारी जारी है।
सरकार का संकल्प
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन को नक्सलवाद के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान बताया है। उन्होंने कहा कि करेगुट्टा पहाड़, जो पहले नक्सलियों का गढ़ था, अब वहां तिरंगा लहरा रहा है। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य रखा है। शाह ने सुरक्षा बलों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन नक्सलवाद की कमर तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
