छत्तीसगढ़ इन दिनों एक बड़े शराब घोटाले की जांच को लेकर सुर्खियों में है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। हाल ही में रायपुर स्थित कांग्रेस भवन (राजीव भवन) पर ईडी की टीम ने पहुंचकर नोटिस जारी किया। इस कदम ने राज्य की राजनीति को हिला कर रख दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच नए सिरे से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
मुख्य भाग
ईडी की टीम जब कांग्रेस भवन पहुंची तो वहां मौजूद नेताओं को नोटिस सौंपा गया। इसके बाद टीम ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव मलकीत सिंह गेड्डू के दफ्तर में जाकर उन्हें भी समन जारी किया। हालांकि, अब तक नोटिस में क्या लिखा गया है, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है।
इस कार्रवाई के तुरंत बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भाजपा पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रही है और ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। दूसरी ओर, भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम बताते हुए कांग्रेस पर घोटाले को छिपाने का आरोप लगाया।
राजनीतिक प्रभाव
ईडी की कार्रवाई ने राज्य में राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह कदम उन्हें दबाने और बदनाम करने के लिए उठाया गया है। वहीं भाजपा इसे एक “साफ-सुथरी राजनीति” की ओर बढ़ता कदम बता रही है। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है और आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की संभावना है।
