April 18, 2026
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UP के डैम खाली होने लगे: सिंचाई और बिजली संकट की ओर बढ़ रहा है प्रदेश

 

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बने डैम और जलाशय राज्य की जीवनरेखा माने जाते हैं। ये न केवल बिजली उत्पादन और सिंचाई में सहायक हैं बल्कि पीने के पानी की आपूर्ति का भी प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन इस वर्ष मानसून कमजोर रहने और बरसात में असमानता के कारण 12 से अधिक डैम आधे से भी कम भरे हुए हैं। यह स्थिति आने वाले समय में प्रदेश की ऊर्जा और जल प्रबंधन के लिए गंभीर संकट का संकेत है।

मुख्य बिंदु

1. रिहंद डैम की गिरती स्थिति

रिहंद डैम, जो प्रदेश का सबसे बड़ा बांध है, सामान्यतः बिजली उत्पादन के लिए अहम माना जाता है।

जल स्तर कम होने के कारण बिजली उत्पादन की क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।

यदि यही स्थिति रही तो ओबरा और अनपरा जैसे पावर प्लांटों पर भी दबाव बढ़ेगा।

2. अन्य डैमों की स्थिति

माताटीला, मेजा और कई अन्य मध्यम आकार के डैमों में भी जल स्तर सामान्य से कम है।

छोटे डैम और तालाब लगभग सूखे की कगार पर हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सिंचाई ठप पड़ सकती है।

3. कमी के कारण

मानसून का अपेक्षित वर्षा न देना।

अधिक तापमान से तेज़ी से पानी का वाष्पीकरण।

जल प्रबंधन की कमी और जलाशयों में गाद भराव की समस्या।

4. संभावित असर

किसानों को खरीफ फसल के बाद रबी सीजन की सिंचाई में कठिनाई होगी।

पीने के पानी का संकट गाँवों और कस्बों में गहराएगा।

बिजली उत्पादन प्रभावित होने से शहरी और औद्योगिक क्षेत्र में लोडशेडिंग बढ़ सकती है।

5. समाधान के उपाय

वर्षा जल संचयन को बड़े पैमाने पर लागू करना।

नहरों और नालों की सफाई तथा गाद निकासी करना।

सिंचाई तकनीकों में पानी की बचत वाली पद्धतियाँ अपनाना।

जलाशयों की वास्तविक स्थिति की निगरानी और डेटा पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

 

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