अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जेम्स लॉरलर ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पाकिस्तान के वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान न सिर्फ पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के जनक थे, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े परमाणु तस्करी नेटवर्क को चलाने वाले व्यक्ति भी थे। लॉरलर ने दावा किया कि खान ने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया जैसे देशों को परमाणु हथियारों की तकनीक, ब्लूप्रिंट और सेंट्रीफ्यूज उपकरण अवैध तरीके से बेचे।
लॉरलर के मुताबिक, डॉ. खान ने ईरान को P-1 और P-2 सेंट्रीफ्यूज डिज़ाइन दिए, जिनका ईरान आज भी उपयोग कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु बम बना लेता है तो सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे देश भी हथियार बनाने की दौड़ में शामिल हो जाएंगे, जिससे पूरा मध्य पूर्व परमाणु हथियारों से भर सकता है।
CIA की जांच में पता चला कि खान का नेटवर्क इतना बड़ा और संगठित था कि पूरी दुनिया में परमाणु बम बनाने की मशीनें, डिजाइन और यूरेनियम संवर्धन तकनीक तस्करी के जरिए पहुंच रही थीं। लॉरलर की टीम ने नकली कंपनियां बनाकर इस नेटवर्क में घुसपैठ की और धीरे-धीरे सभी कड़ियों को उजागर किया। कई बार CIA ने जानबूझकर खराब पार्ट्स भेजकर ईरान और लीबिया के सेंट्रीफ्यूजों को निष्क्रिय भी किया।
2003 में मलेशिया से लीबिया जा रहे एक जर्मन जहाज “BBC China” से जब सेंट्रीफ्यूज के पुर्जे पकड़े गए, उसके बाद लीबिया ने अपना पूरा न्यूक्लियर प्रोग्राम हमेशा के लिए बंद कर दिया और सभी सामग्री अमेरिका को सौंप दी।
लॉरलर ने यह भी दावा किया कि कादिर खान पाकिस्तानी जनरलों और नेताओं को रिश्वत देता था, जिससे उसे संरक्षण मिलता रहा। लॉरलर के अनुसार, 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत थी, इसलिए अमेरिका ने जानकर भी खान की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।
इंटरव्यू में लॉरलर ने कहा कि भारत और अमेरिका को परमाणु तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना चाहिए, क्योंकि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। अपने आक्रामक काम करने के अंदाज के कारण लॉरलर CIA में “Mad Dog” निकनेम से भी जाने जाते थे।
