नई दिल्ली : प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजय सान्याल ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने की राह में सबसे बड़ी अड़चन ज्यूडिशियल सिस्टम है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की कई पुरानी परंपराएँ और कार्यशैली ब्रिटिश काल से चली आ रही हैं, जिन्हें अब बदलने का समय आ गया है।
सान्याल ने वकीलों और एटॉर्नी जनरल्स की कॉन्फ्रेंस में कहा कि अदालतों में आज भी जजों को “My Lord” कहकर संबोधित किया जाता है। यह शब्द ब्रिटिश राज की देन है और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जज भी जनता के सेवक हैं, उन्हें किसी ईश्वर या राजा की तरह संबोधित करना उचित नहीं।
अदालतों की छुट्टियाँ भी सवालों के घेरे में
उन्होंने कहा कि न्यायालयों में महीनों लंबी छुट्टियाँ आम बात हैं, जिसके कारण लाखों मामलों की सुनवाई सालों तक लंबित रहती है। गर्मियों और सर्दियों की लंबी छुट्टियाँ आम जनता को न्याय मिलने की राह में बाधा हैं न्यायपालिका को भी एक पब्लिक सर्विस की तरह चलना चाहिए, जैसे पुलिस, अस्पताल और स्कूल चलते हैं। जनता को 24×7 न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में काम होना चाहिए।
जटिल कानून और मध्यस्थता पर सवाल
सान्याल ने कहा कि भारत में कानून इतने जटिल हैं कि वे विवाद सुलझाने के बजाय और उलझा देते हैं। 1% लोग इन कानूनों का दुरुपयोग करते हैं, और उसी 1% को रोकने के लिए बने कठोर प्रावधानों का खामियाजा 99% नागरिक भुगतते हैं। उन्होंने मेडिएशन (मध्यस्थता) को भी अनिवार्य करने पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया अक्सर असफल होती है और केस सालों तक लटके रहते हैं।
विकसित भारत के लिए नई सोच
सान्याल का कहना था कि भारत को 2047 तक विकसित बनाने की राह में सबसे अहम काम न्यायपालिका में सुधार है। न्यायपालिका को जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह और तेज़ बनाना होगा। अंग्रेजी दौर की परंपराओं को खत्म कर भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित नई कार्यप्रणाली अपनानी होगी। कोर्ट को पब्लिक सर्विस मॉडल पर चलाना होगा, ताकि लोगों को समय पर और सुलभ न्याय मिल सके।
