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July 21, 2026
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चीन का नया कदम: अमेरिका ने H-1B महंगा किया तो बीजिंग लाया K-वीजा

अमेरिका ने हाल ही में H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर का भारी शुल्क लगा दिया है। इससे आईटी, टेक्नोलॉजी और रिसर्च सेक्टर के विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका का रास्ता और महंगा हो गया है।

इसी बीच चीन ने अपने दरवाज़े खोल दिए हैं और K-वीजा की घोषणा कर दी। ये वीजा 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा।

क्या है K-वीजा की खासियत

  • नौकरी ऑफर की ज़रूरत नहीं: किसी चीनी कंपनी से जॉब ऑफर लिए बिना भी आवेदन किया जा सकेगा।
  • STEM युवाओं के लिए अवसर: साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स बैकग्राउंड वाले युवाओं को मिलेगा सीधा मौका।
  • शोध और उद्यमिता पर फोकस: रिसर्च, एजुकेशन, कल्चरल एक्सचेंज और स्टार्टअप एक्टिविटीज़ की भी अनुमति।

युवा प्रतिभाओं को टारगेट: चीन का मकसद है दुनिया भर से “ब्राइट माइंड्स” को आकर्षित करना।

चुनौतियाँ और सवाल

“युवा” की परिभाषा क्या होगी, इसकी उम्र सीमा तय नहीं।कौन-सी यूनिवर्सिटी या रिसर्च एक्सपीरियंस मान्य होंगे, इस पर नियम आने बाकी। वीजा की वैधता, नवीनीकरण और स्टे ड्यूरेशन की पूरी जानकारी अक्टूबर में सामने आएगी।

क्यों अहम है ये फैसला

H-1B वीजा फीस बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय और एशियाई युवाओं के सामने मुश्किल खड़ी हो गई थी। अब चीन उन्हें सीधा विकल्प देकर टैलेंट रेस में अमेरिका को चुनौती दे रहा है।

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