तेहरान: इजराइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने शुक्रवार को ईरान की राजधानी तेहरान के गिशा इलाके में एक सटीक हवाई हमला किया, जिसमें एक प्रमुख ईरानी न्यूक्लियर साइंटिस्ट और तीन सैन्य कमांडर मारे गए। इजराइली मीडिया ने दावा किया कि यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाने के लिए था। इस हमले ने मध्य पूर्व में दोनों देशों के बीच तनाव को और भड़का दिया है। दूसरी ओर, भारत ने अपने 310 नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकालकर दिल्ली पहुंचाया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हो रही है।
हमले का विवरण
इजराइली अधिकारियों के अनुसार, यह हमला ऑपरेशन ‘राइजिंग लायन’ का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु और सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना है। गिशा में एक बहुमंजिला इमारत को निशाना बनाया गया, जहां न्यूक्लियर साइंटिस्ट और सैन्य कमांडर मौजूद थे। मारे गए साइंटिस्ट का नाम अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम से जुड़े थे। तीनों कमांडर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी थे।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हमले की निंदा करते हुए कहा, “जब तक इजराइली हमले जारी रहेंगे, हम किसी भी देश के साथ बातचीत नहीं करेंगे।” ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा हमला नहीं हुआ।
भारतीयों की सुरक्षित वापसी
इस बीच, भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए त्वरित कार्रवाई की। शुक्रवार देर रात एक विशेष उड़ान 310 भारतीयों को लेकर दिल्ली पहुंची। इनमें छात्र, तीर्थयात्री और व्यवसायी शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमारी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा है।” भारतीय दूतावास ने ईरान में 24×7 हेल्पलाइन शुरू की है।
विश्लेषण: तनाव का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइली हमले से ईरान का परमाणु कार्यक्रम कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है, लेकिन यह क्षेत्रीय युद्ध को और भड़का सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हमले पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की, लेकिन व्हाइट हाउस ने अगले दो हफ्तों में अपनी भूमिका तय करने की बात कही है।
