शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर जब संपूर्ण देशभर में शक्ति स्वरूपा मातृशक्ति की आराधना की जा रही है, उसी कड़ी में सामाजिक संस्था नवसृजन मंच ने बेटियों के जन्मोत्सव को विशेष स्वरूप देने का निर्णय लिया है। संस्था द्वारा लगातार दस वर्षों से आयोजित हो रहे बिटिया जन्मोत्सव का आयोजन इस वर्ष भी 25 सितम्बर को वृंदावन हाल, सिविल लाइन में किया जाएगा।
इस अवसर पर संस्था 101 नवजात बेटियों के माता-पिता का सम्मान करेगी। उन्हें न केवल सम्मान पत्र प्रदान किया जाएगा बल्कि बच्चों के पालन-पोषण की प्रारंभिक ज़रूरतें पूरी करने के लिए बेबी किट जिसमें फ्रॉक और अन्य उपयोगी सामग्री होगी, उपहार स्वरूप दी जाएगी। यही नहीं, इन 101 कन्याओं का पूजन आदि शक्ति के स्वरूप में कर कन्या भोज का भी आयोजन होगा।
कार्यक्रम में बेटियों के जन्म के बाद माताओं के आहार व पोषण पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं—जैसे नोनी सुरक्षा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, मातृत्व सुरक्षा योजना—की जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा दी जाएगी। कार्यक्रम स्थल पर हेल्प डेस्क भी लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से माता-पिता को तत्काल योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब कौशल मुख्य अतिथि होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता भावना वोहरा, विधायक पंडरिया, करेंगी। वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, बाल संरक्षण आयोग, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
नवसृजन मंच के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. देवाशीष मुखर्जी ने बताया कि संस्था प्रतिवर्ष चैत्र और शारदीय नवरात्रि में इस तरह के बड़े आयोजन करती है। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में भी वर्षभर समय-समय पर छोटे आयोजन होते रहते हैं ताकि समाज में बेटियों के जन्म के प्रति सकारात्मक वातावरण बने।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था से जुड़े सदस्य—अमरजीत सिंह छाबड़ा, कांतिलाल जैन, किशोर महानन्द, राजेश साहू, डॉ. प्रीति सतपथी, मनीषा सिंह, डॉ. रश्मि चावरे, विनय शर्मा, मनोज जैन, नरेश नामदेव, डॉ. यूलेन्द्र राजपूत, श्रद्धा राजपूत, अंजली और सुनीता पाठक सहित राजधानी की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के सदस्य सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
इस प्रकार, यह आयोजन न केवल नवजात बेटियों और उनकी माताओं को सम्मान देने का एक प्रयास है, बल्कि समाज में बेटियों के महत्व और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल भी है।
