देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा सितंबर 2025 में जारी औषधि गुणवत्ता रिपोर्ट ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। इस रिपोर्ट के अनुसार 112 दवाओं के नमूने क्वालिटी टेस्ट में असफल रहे हैं, जबकि एक दवा को नकली (Spurious) घोषित किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि नकली पाई गई दवा छत्तीसगढ़ से संबंधित है।
छत्तीसगढ़ में जांचे गए 10 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। राज्य में विशेष चिंता का विषय यह रहा कि एल्बेंडाजोल के चार अलग-अलग बैच लगातार क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए। यह एक सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली कृमिनाशक दवा है, जिसे एएफएफवाई पैरेंटेरल्स कंपनी द्वारा बनाया गया था। जांच में पाया गया कि सभी सैंपल “डिजोल्यूशन टेस्ट” में फेल हो गए — यानी दवा शरीर में घुलकर अपेक्षित प्रभाव नहीं डाल रही थी। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी दवाएं न केवल अप्रभावी साबित हो सकती हैं बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह भी हो सकती हैं।
इसके अलावा मकालेयड्स फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की एक क्रीम में नकली सामग्री पाई गई। यह क्रीम फंगल संक्रमण के इलाज में दी जाती है। जांच में सामने आया कि यह उत्पाद असली ब्रांड की नकल कर बनाया गया था और इसे बनाने वाली कंपनी के पास वैध लाइसेंस भी नहीं था
राज्य में अन्य कई दवाओं में भी गंभीर गुणवत्ता दोष मिले हैं। एमोक्सिसिलिन टैबलेट, पैरासिटामॉल और अन्य आम उपयोग की जाने वाली दवाएं भी “Assay Test” में असफल पाई गईं, जिससे स्पष्ट हुआ कि इन दवाओं में सक्रिय तत्व की मात्रा निर्धारित मानक से कम थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित राज्यों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल दवा गुणवत्ता नियंत्रण का ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। यदि ऐसी दवाएं मरीजों तक पहुंचती हैं, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
इस घटना ने दवा निर्माण कंपनियों की निगरानी व्यवस्था और सरकारी नियंत्रण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोषी कंपनियों पर क्या कार्रवाई की जाती है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।
