July 22, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

बिलासपुर रेल हादसा: साइको टेस्ट में फेल पायलट को ट्रेन सौंपी, जोन अफसर की लापरवाही उजागर! 15 नवंबर तक फाइनल रिपोर्ट, जिम्मेदार अफसरों पर गिर सकती है गाज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में हुए बड़े रेल हादसे ने रेलवे सिस्टम की लापरवाहियों को बेनकाब कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिस लोको पायलट को यात्री ट्रेन की जिम्मेदारी दी गई थी, वह साइकोलॉजिकल टेस्ट (मानसिक फिटनेस) में फेल पाया गया था। इसके बावजूद अफसरों ने उसे ड्यूटी पर भेज दिया।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, पायलट ने जून 2025 में साइको टेस्ट में सफलता नहीं पाई थी। नियम के अनुसार, ऐसे कर्मियों को तब तक ट्रेन चलाने की अनुमति नहीं होती जब तक वे दोबारा टेस्ट पास न कर लें। लेकिन जोन-स्तर के अफसरों की लापरवाही के चलते उसे ट्रेन संचालन की अनुमति दे दी गई — और वही ट्रेन हादसे का शिकार हुई।

जांच में खुला राज: अफसरों की चेन में कई स्तरों पर गड़बड़ी

रेलवे की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह हादसा “मानव चूक + प्रशासनिक लापरवाही” का नतीजा है। लोको पायलट ने सिग्नल ओवररन किया, यानी रेड सिग्नल पार कर गया। सुपरवाइजिंग अफसरों ने फेल रिपोर्ट होने के बाद भी अनुमोदन किया। रेल सुरक्षा आयुक्त (CRS) की टीम 15 नवंबर तक फाइनल रिपोर्ट सौंपेगी।

इस बीच, रेलवे ने 19 से ज्यादा कर्मचारियों से पूछताछ की है। दोषी अफसरों पर निलंबन की तैयारी है।

तकनीकी और सिस्टम की खामी भी आई सामने

जांच में पाया गया कि ट्रेन की ब्रेकिंग सिस्टम में भी खामी थी और इंटरलॉकिंग सिग्नल सिस्टम को लेकर कई चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया था। हादसे के बाद जोन अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

अब क्या होगा आगे

रेलवे बोर्ड ने सभी जोन में साइको टेस्ट की प्रक्रिया की पुनः समीक्षा के आदेश दिए हैं। लोको पायलटों की मासिक मेडिकल फिटनेस और साइकोलॉजिकल मॉनिटरिंग को सख्त करने की तैयारी है।

 घटना का पृष्ठभूमि

4 नवंबर 2025 की रात बिलासपुर-कोरबा रूट पर पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में 8 यात्रियों की मौत और कई घायल हुए थे। हादसे के बाद पूरा रेल संचालन ठप रहा और करीब 16 ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा।

लोगों ने कहा – यह सिस्टम की नाकामी है

स्थानीय यात्रियों ने कहा कि “अगर टेस्ट में फेल पायलट को ट्रेन चलाने की अनुमति न दी जाती, तो यह हादसा टल सकता था।”

यह हादसा सिर्फ एक रेल दुर्घटना नहीं, बल्कि रेलवे की मानव संसाधन और सुरक्षा प्रणाली की नाकामी की गवाही है। 15 नवंबर को आने वाली फाइनल रिपोर्ट तय करेगी — गलती किस स्तर पर हुई और किस पर कार्रवाई होगी।

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