April 17, 2026
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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज—पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

बिलासपुर में पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की आठवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर रायपुर रोड स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि पं. चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ की अस्मिता, भाषा और साहित्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में जो योगदान दिया, वह अतुलनीय है।

छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाने का सपना—रुद्ध अवस्थी

वरिष्ठ पत्रकार रुद्ध अवस्थी ने कार्यक्रम में कहा कि पं. चतुर्वेदी का छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने का सपना आज भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी जी ने पद्मश्री मिलने के बाद भी छत्तीसगढ़ी को केंद्र की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग राष्ट्रपति तक पहुंचाई थी। अब इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत है।

महापौर पूजा विधानी ने याद किया योगदान

महापौर ने कहा कि पं. चतुर्वेदी ने बिलासपुर और छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए विशिष्ट कार्य किए और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी चर्चित कविताएँ ‘बेटी के बिदा’ और काव्य संग्रह ‘पर्रा भर लाई’ ने उन्हें विशेष लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी जी के अधूरे सपनों को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

जूदेव और चतुर्वेदी के बीच भावपूर्ण प्रसंग

कार्यक्रम में विधायक सुशांत शुक्ला ने एक संस्मरण साझा किया कि कैसे एक बार कुमार दिलीप सिंह जूदेव, अस्पताल से छत्तीसगढ़ भवन लौटते हुए चतुर्वेदी जी की खराब तबीयत की खबर सुनकर पैदल ही उनके निवास पहुँच गए। इस प्रसंग ने दोनों के रिश्ते और आपसी सम्मान को दर्शाया।

छत्तीसगढ़ के हित के लिए समर्पित—किशोर राय

भाजपा नगर प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक किशोर राय ने कहा कि पं. चतुर्वेदी ऐसे महात्मा थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ के हित को अपना परमहित मानकर आजीवन कार्य किया। उन्होंने 60 वर्षों से अधिक समय तक पत्रकारिता और छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए सतत योगदान दिया।

छत्तीसगढ़ी साहित्य की पहचान—विधायक सुशांत शुक्ला

बेलतरा विधायक ने कहा कि पं. चतुर्वेदी ने जाति, वर्ग और संप्रदाय से ऊपर उठकर ‘छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान’ को जागृत किया और साहित्य को नई दिशा दी। उन्होंने घोषणा की कि ‘पुरखा के सुरता’ कार्यक्रम के अंतर्गत कोनी में उनके नाम पर साहित्य केंद्र स्थापित किया जाएगा।

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