40 C
Raipur
June 13, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़बड़ी खबर

रावतपुरा मेडिकल कॉलेज रिश्वतकांड में बड़ा खुलासा: ED को मिले डिजिटल सबूत, फर्जी मरीज–फेक फैकल्टी और अफसरों से मिलीभगत के प्रमाण

देशभर में मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े रिश्वतकांड में अब रावतपुरा मेडिकल कॉलेज का नाम प्रमुखता से सामने आया है। ईडी (Enforcement Directorate) की रेड में कई डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, DVR, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और बैंक अकाउंट संबंधी जानकारी शामिल है। ईडी का दावा है कि मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने वाली प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा, हवाला लेन-देन और मंत्रालय स्तर पर जानकारी लीक करने का संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

रायपुर स्थित रावतपुरा मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी से ईडी ने घंटों पूछताछ की। जांच में सामने आया कि निरीक्षण के समय कॉलेजों में फर्जी मरीज भर्ती कराए जाते थे, नाममात्र की फैकल्टी को पूर्णकालिक दिखाया जाता था और अस्पताल की क्षमता बढ़ा–चढ़ाकर प्रस्तुत की जाती थी। इसके पीछे दलालों, कॉलेज प्रबंधन और मंत्रालय के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है।

सीबीआई की FIR में आरोप है कि निरीक्षण से पहले कॉलेजों को गोपनीय जानकारी लीक की जाती थी, ताकि वे फर्जी तैयारियां कर सकें। यही आधार बनाकर ईडी ने अपनी जांच शुरू की। चौंकाने वाली बात यह रही कि कॉलेजों को बताया जाता था कि उन्हें कितने पैसे देने होंगे और हवाला ऑपरेटर कब संपर्क करेगा। ईडी के अनुसार, यह पूरा रैकेट देश के कई राज्यों में फैला था।

जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि NMC निरीक्षण टीम के सदस्यों को रिश्वत देने के लिए बिचौलियों के माध्यम से रकम का लेन-देन किया जाता था। फर्जी फैकल्टी, नाममात्र की लैब, और नकली मरीजों को दिखाकर कॉलेज मानकों को पूरा दिखाते थे। कई जगहों पर घोस्ट फैकल्टी—यानी कागज पर मौजूद लेकिन वास्तविक रूप से अनुपस्थित—का इस्तेमाल किया गया।

1 जुलाई को CBI ने डॉक्टर मंजप्पा, डॉक्टर चैत्रा, डॉक्टर अशोक और कॉलेज डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बेंगलुरु में बिछाए गए ट्रैप में 55 लाख रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद हुई। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क के जरिए लाखों की रकम इधर–उधर की जा रही थी। यह पूरा मामला अब मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ चुका है, जिसके बाद ED की एंट्री हुई।

देश भर में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दिलाने और सीट बढ़ाने के इस घोटाले ने स्वास्थ्य क्षेत्र की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह रैकेट वर्षों से सक्रिय था और इसमें कई स्तरों पर भ्रष्टाचार शामिल था—कॉलेज प्रबंधन से लेकर मंत्रालय के अफसरों तक।

ईडी की टेक्निकल टीम अब जब्त किए गए डिजिटल सबूतों की गहन जांच कर रही है। शुरुआती संकेतों के मुताबिक, यह भारत के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अब तक के सबसे संगठित रैकेटों में से एक हो सकता है।

Related posts

बिलासपुर के मोपका सब स्टेशन में भीषण आग, शॉर्ट सर्किट की आशंका; आधे शहर की बिजली ठप

admin

SP के आदेश की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई, थाना प्रभारी और आरक्षक निलंबित

admin

बजट से पहले सरकार का मंथन तेज: ओपी चौधरी के नेतृत्व में 4 दिन तक मंत्रियों से सीधी बातचीत, प्राथमिकताओं पर होगा फोकस

admin

Leave a Comment