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September 6, 2026
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75 साल के रिश्तों के बीच जॉर्डन दौरे पर पीएम मोदी, व्यापार, IMEC और रणनीतिक साझेदारी पर होगी अहम बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15–16 दिसंबर को जॉर्डन के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वर्ष 1950 में दोनों देशों ने औपचारिक रूप से राजनीतिक संबंध स्थापित किए थे और 2025 में इस साझेदारी ने 75 साल का महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। इसी ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी का जॉर्डन दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ विस्तृत बातचीत होगी। इसमें राजनीतिक सहयोग, रक्षा, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जॉर्डन मध्य-पूर्व में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी दोनों देशों के संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है।

आर्थिक मोर्चे पर भारत और जॉर्डन के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच लगभग 26,033 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपये रहा। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर (करीब 45,275 करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।

जॉर्डन भारत के लिए उर्वरक और कच्चे माल का एक प्रमुख स्रोत है। भारत अपने कुल रॉक फॉस्फेट आयात का लगभग 40 प्रतिशत जॉर्डन से खरीदता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए बेहद अहम है। वहीं जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक सामान आयात करता है। भारतीय कंपनियां जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी हैं, जिससे आर्थिक सहयोग और गहरा हुआ है।

इस दौरे में इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर भी चर्चा होने की संभावना है। इस कॉरिडोर में भारत, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन शामिल हैं। IMEC का उद्देश्य भारत, मिडिल ईस्ट और यूरोप के बीच एक नया, तेज और किफायती व्यापार मार्ग तैयार करना है। इसके तहत समुद्री और रेल मार्गों के जरिए माल ढुलाई को आसान बनाया जाएगा।

इस परियोजना के अनुसार भारत से सामान पहले समुद्री मार्ग से यूएई या सऊदी अरब पहुंचेगा, वहां से रेल के जरिए जॉर्डन और इजराइल होते हुए यूरोप भेजा जाएगा। IMEC कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 6,000 किलोमीटर मानी जा रही है, जिसमें करीब 3,500 किलोमीटर का समुद्री मार्ग शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, इस कॉरिडोर के पूरा होने से भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में करीब 40 प्रतिशत समय की बचत होगी और लागत में भी लगभग 30 प्रतिशत की कमी आएगी।

जॉर्डन से इजराइल तक रेल मार्ग पर अभी काम होना बाकी है और इसे तेज करने में पीएम मोदी के इस दौरे को अहम माना जा रहा है। IMEC को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। वर्ष 2023 के G20 शिखर सम्मेलन में भारत में पहली बार इस कॉरिडोर की औपचारिक घोषणा हुई थी।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी का जॉर्डन दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत–जॉर्डन रिश्तों को व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग के नए स्तर तक ले जाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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