छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रह चुकी सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर विशेष PMLA कोर्ट में पेश किया। ईडी का दावा है कि इस कथित घोटाले में सौम्या चौरसिया ने को-ऑर्डिनेटर की अहम भूमिका निभाई और अवैध शराब सिंडिकेट से उन्हें करीब 100 करोड़ रुपये मिले।
कोर्ट में पेशी के दौरान ईडी ने बताया कि जांच में कई डिजिटल और दस्तावेजी सबूत सामने आए हैं, जिनमें सौम्या चौरसिया, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर और चैतन्य बघेल के बीच हुई बातचीत और पैसों के मैनेजमेंट से जुड़े तथ्य शामिल हैं। ईडी का कहना है कि शराब घोटाले से अर्जित अवैध धन के वितरण और संचालन में सौम्या की भूमिका केंद्रीय रही।
वहीं, बचाव पक्ष ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सौम्या चौरसिया को अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया। उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि पूछताछ के नाम पर उन्हें जोनल ऑफिस बुलाया गया और बिना मजिस्ट्रेट जांच के गिरफ्तारी कर ली गई। साथ ही यह भी दलील दी गई कि जांच के दौरान तथ्यों और राशि को लेकर कहानी बदली गई है।
पेशी के दौरान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भी कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि 11 महीने बाद उन्हें पहली बार पेशी के लिए लाया गया है और वे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने इलाज के लिए बाहर ले जाने की अनुमति की मांग भी की।
गौरतलब है कि सौम्या चौरसिया इससे पहले भी कोयला घोटाले, डीएमएफ घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच के दायरे में रह चुकी हैं। वे करीब ढाई साल जेल में रह चुकी हैं और हाल ही में जमानत पर बाहर आई थीं। अब शराब घोटाले में यह उनकी दूसरी गिरफ्तारी है।
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सौम्या चौरसिया को दो दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। अगली पेशी शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे निर्धारित की गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में जांच और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
