रायपुर जैन धर्म की महान विभूतियों के जीवन, त्याग और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को रेखांकित करती एक महत्वपूर्ण पुस्तक हाल ही में समाज के समक्ष प्रस्तुत की गई। यह पुस्तक जैन परंपरा की उस समृद्ध विरासत को सामने लाती है, जिसने न केवल आध्यात्मिक चेतना को दिशा दी, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन को भी नैतिक मूल्यों से समृद्ध किया है। कृति में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर डॉ. विक्रम साराभाई तक 13 महान विभूतियों के जीवन प्रसंगों को शोधपरक और प्रेरणादायी रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इस अवसर पर सकल जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पुस्तक की अवधारणा, उद्देश्य और सामाजिक-राष्ट्रीय उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रतिनिधियों ने बताया कि यह पुस्तक भारत के दिव्य चरित्र और जैनत्व की मूल भावना—अहिंसा, संयम और त्याग—से प्रेरणा लेकर लिखी गई है। इसका उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी, विशेषकर युवाओं को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ना है।
प्रतिनिधिमंडल में विकास दुगड़, चंद्रकांत लुंकड़, प्रवीण कुमार जैन, उत्तम संखलेचा, हर्ष वेद और गगन बड़ड़िया शामिल रहे। इस दौरान संयोजक प्रवीण सिंगी ने पुस्तक की विषय-वस्तु की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें जैन परंपरा से प्रेरित महान व्यक्तित्वों के जीवन, विचार और राष्ट्रहित में उनके योगदान को सरल एवं प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रतिपादित अहिंसा और कृषि-आधारित जीवन प्रणाली आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है, जब विश्व ग्लोबल वार्मिंग और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से जूझ रहा है। पुस्तक को हिंदी और अंग्रेज़ी—दोनों भाषाओं में प्रकाशित किए जाने की योजना को समय की आवश्यकता बताया गया, जिससे इसकी पहुंच व्यापक वर्ग तक सुनिश्चित हो सके।
समग्र रूप से यह कृति न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगी और युवा पीढ़ी को मूल्यों, सेवा और राष्ट्रभावना के मार्ग पर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
