दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित बाल संप्रेषण गृह (Juvenile Home) से रविवार देर रात तीन नाबालिगों के फरार होने की घटना ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलगांव थाना क्षेत्र में स्थित यह सुधार गृह राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन संचालित है। घटना की जानकारी मिलते ही जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिस ने चार अलग-अलग टीम बनाकर तलाशी अभियान शुरू किया।
कैसे हुई घटना:
रविवार की रात करीब 11 बजे के आसपास तीनों नाबालिगों ने योजना बनाकर सुधार गृह की पिछली दीवार फांदकर भाग निकले। बताया जा रहा है कि सभी को किसी ना किसी आपराधिक प्रकरण में पकड़ा गया था और न्यायालय के आदेश से उन्हें सुधार गृह में रखा गया था।
CCTV फुटेज में तीनों के दीवार की ओर बढ़ने और भागने के दृश्य कैद हुए हैं। गार्ड को इसकी भनक तब लगी जब गिनती के दौरान तीनों नाबालिग नदारद पाए गए। तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई।
पुलिस की कार्रवाई:
पुलगांव थाना पुलिस ने घटना के बाद बाल संप्रेषण गृह के स्टाफ से पूछताछ की। इसके अलावा, तीनों नाबालिगों के परिजनों से भी संपर्क किया गया है। पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर दी है और बस अड्डों, रेलवे स्टेशन व प्रमुख मार्गों पर चेकिंग तेज कर दी गई है। साथ ही CCTV फुटेज को फ्रेम-दर-फ्रेम खंगाला जा रहा है ताकि उनके भागने की दिशा और संभावित छिपने के ठिकाने का सुराग मिल सके।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं:
जानकार बताते हैं कि दुर्ग के इस सुधार गृह से यह पहली फरारी नहीं है। इससे पहले भी दो बार नाबालिग भाग चुके हैं। हालांकि उन्हें कुछ ही दिनों में पुलिस ने पकड़ लिया था।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि गृह की सुरक्षा व्यवस्था अक्सर लचर रहती है। कई बार गार्डों की संख्या कम होती है, और रात्रि निगरानी भी प्रभावी नहीं रहती। सुधार गृह में कैमरे तो लगे हैं, लेकिन उनकी मॉनिटरिंग में लापरवाही सामने आती रही है।
प्रशासनिक समीक्षा के आदेश:
घटना के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल बाल संप्रेषण गृह की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग से रिपोर्ट मांगी है और सुधार गृह की गार्ड ड्यूटी, कैमरा कवरेज, तथा नाबालिगों की निगरानी प्रणाली की जांच के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया:
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि सुधार गृह का उद्देश्य नाबालिगों को सुधारना है, न कि उन्हें ऐसी लापरवाही के माहौल में रखना जहाँ वे दोबारा अपराध की ओर लौटने को मजबूर हों।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सुधार गृहों में “सुधार” से अधिक “निगरानी की कमी” मौजूद है।
