रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के स्टोर रूम में शनिवार रात लगी आग ने शिक्षा विभाग की वर्षों पुरानी अव्यवस्थाओं को उजागर कर दिया है। इस हादसे में करीब 26 वर्षों का महत्वपूर्ण शैक्षणिक रिकॉर्ड जलकर नष्ट हो गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है, हालांकि प्रशासनिक लापरवाही भी इस घटना की बड़ी वजह मानी जा रही है।
घटना शनिवार रात करीब 8 से 8.30 बजे के बीच की है, जब DEO कार्यालय के स्टोर रूम से अचानक आग की लपटें उठती देखी गईं। आग तेजी से फैलती चली गई। सूचना मिलने के लगभग 20 मिनट बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन देर रात तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। आग बुझने के दो दिन बाद भी कार्यालय की व्यवस्थाएं पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाईं और कर्मचारियों को अंधेरे में काम करना पड़ा।
इस आग में वर्ष 1998 से लेकर 2024 तक के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें और रिकॉर्ड जलकर खाक हो गए। इनमें नियुक्ति, पदस्थापना, छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन सहित कई योजनाओं से जुड़े अभिलेख शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2008 के बाद की अधिकांश जानकारियां डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं, इसलिए उन्हें दोबारा रिकवर किया जा सकेगा, लेकिन इससे पहले का अधिकांश रिकॉर्ड पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
DEO कार्यालय का यह भवन लगभग 100 साल पुराना बताया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन पहले से ही इसे लेकर हादसे की आशंका जता चुका था। कई बार मरम्मत कराई गई और नई बिल्डिंग के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन उसे अब तक स्वीकृति नहीं मिली। यही कारण है कि जर्जर भवन और पुरानी विद्युत व्यवस्था इस बड़े नुकसान की वजह बनी।
फिलहाल तीन सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम आग लगने के कारणों की जांच में जुटी है। प्राथमिक तौर पर इस घटना को हादसा माना जा रहा है, न कि किसी साजिश का परिणाम। वहीं, डेटा रिकवरी का काम भी शुरू कर दिया गया है। जले हुए कंप्यूटर, लैपटॉप और हार्ड डिस्क को जांच के लिए भेजा गया है।
यह घटना सिर्फ एक आगजनी नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तरों में बुनियादी ढांचे की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। अब सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद प्रशासन समय रहते सबक लेगा, या फिर अगली आपदा का इंतजार किया जाएगा।
