April 17, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

भाजपा के मार्गदर्शक बिसे यादव ‘गुरुजी’ का निधन, डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक यात्रा से गहरा नाता

दुर्ग की राजनीति के प्रमुख चेहरे और भारतीय जनता पार्टी के आधार स्तंभ माने जाने वाले बिसे यादव ‘गुरुजी’ का निधन क्षेत्रीय और राजनीतिक जगत के लिए गहरा आघात है। 73 वर्ष की आयु में उन्होंने आज अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे ‘गुरुजी’ के निधन से भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर 12 बजे हरनाबांधा मुक्तिधाम में हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

बिसे यादव को दुर्ग में भाजपा की स्थापना और विस्तार के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्हें पार्टी के उस दौर के संघर्षशील नेता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने भाजपा के लिए जमीन तैयार की। कहा जाता है कि डॉ. रमन सिंह को भाजपा की सदस्यता दिलाने का श्रेय भी बिसे यादव को जाता है। 1986-87 में जब भाजपा की स्थिति बेहद कमजोर थी, तब वे वरिष्ठ नेता गोविंद सारंग के साथ कवर्धा पहुंचे और वहीं डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर उन्हें भाजपा का प्राथमिक सदस्य बनाया। यही क्षण डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत था, और इसके पीछे ‘गुरुजी’ का योगदान सबसे अहम रहा।

उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्षों से भरी रही। 1984 में भाजपा ने उन्हें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और परिवहन मंत्री मोतीलाल वोरा के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उनकी चुनौती ने राजनीति में नई पहचान दी। 1989 के दुर्ग विधानसभा उपचुनाव में भी उन्होंने मोतीलाल वोरा को चुनौती दी और शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि वे यह चुनाव भी हार गए, लेकिन कांग्रेस जैसे दिग्गज नेताओं को चुनौती देने की उनकी क्षमता ने उनकी राजनीतिक हैसियत को और मज़बूत बना दिया।

बिसे यादव ने राजनीति को हमेशा जनसेवा का माध्यम माना। संगठनात्मक कौशल, निष्ठा और समर्पण की भावना ने उन्हें कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच ‘गुरुजी’ की उपाधि दिलाई। उनका पूरा जीवन भाजपा संगठन को मजबूत करने और जनता की सेवा के लिए समर्पित रहा। वे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने राजनीति में विचारधारा और संघर्ष को सर्वोपरि माना।

उनके निधन से दुर्ग ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति को गहरा धक्का लगा है। भाजपा संगठन ने एक मार्गदर्शक और संघर्षशील नेता को खो दिया है। आने वाले समय में उनकी स्मृतियां और योगदान कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

Related posts

छत्तीसगढ़ राज्यसभा सीट पर BJP का सियासी संदेश: लक्ष्मी वर्मा पर भरोसा, दिग्गज दावेदारों की उम्मीदें टूटीं

admin

CG में 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा का नया नियम: कोई छात्र फेल नहीं, पूरक मौका देकर अगली कक्षा में प्रवेश

admin

कांकेर धर्मांतरण विवाद: सर्वसमाज का छत्तीसगढ़ बंद, स्कूल-दुकानें ठप

admin

Leave a Comment