सिरपुर महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का संकल्प दोहराया। महासमुंद जिले के प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल सिरपुर में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन करते हुए उन्होंने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 200 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सिरपुर केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके लिए आधुनिक सड़कें, सुव्यवस्थित पार्किंग, आकर्षक लाइटिंग व्यवस्था और टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर का निर्माण किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि सिरपुर को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं, ताकि इसकी प्राचीन विरासत को वैश्विक पहचान मिल सके।
महोत्सव में मलेशिया, कोरिया और जापान जैसे देशों से आए बौद्ध विचारकों और अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने सिरपुर को सनातन, बौद्ध और जैन संस्कृतियों का अद्भुत संगम बताते हुए कहा कि यह स्थल भारत की विविधता और सहिष्णुता का जीवंत उदाहरण है। साथ ही पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए विशेष कॉरिडोर और योजनाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।
इसके अतिरिक्त सिरपुर बैराज की स्वीकृति और सिकासेर-कोडार डैम लिंक परियोजना का भी उल्लेख किया गया, जिससे किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी पहुंचाने की योजना है। इस प्रकार सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यटन विकास और कृषि हितों को साथ लेकर सिरपुर को एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने का संकेत दिया।
