बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में पुलिसिंग को फिर से सख्त बनाकर बीट गश्त प्रणाली को दोबारा लागू कर दिया गया है, ताकि शहर और ग्रामीण इलाकों में अपराधों पर कड़ी नजर रखी जा सके और पुलिस की जमीनी मौजूदगी मजबूत की जा सके। पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और सीमित सूचना के कारण पारंपरिक बीट प्रणाली सुस्त हो गई थी, लेकिन अब इसे नए सिरे से सक्रिय किया गया है।
बीट प्रणाली के पुनः लागू होने के बाद अब सभी थाना क्षेत्रों में जवान तीन शिफ्टों में गश्त करेंगे। सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक यह गश्त जारी रहेगी। इन सभी शिफ्टों में पुलिस personnel न सिर्फ पैदल गश्त करेंगे बल्कि विशेष रूप से रात की शिफ्ट में हथियारबंद जवान क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
शहरी इलाकों के अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में भी बीट गश्त को व्यवस्थित किया गया है। जहां क्षेत्रफल अधिक है, वहाँ दो शिफ्ट में विभाजित गश्त व्यवस्था लागू की गई है और प्रत्येक थाना क्षेत्र में दो से तीन बीट निर्धारित की गई हैं। इसका लक्ष्य चोरियों, अवैध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण रखना है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्षों में तकनीकी जांच और मॉनिटरिंग पर ध्यान ज़्यादा केंद्रित होने से पारंपरिक बीट इंस्पेक्शन कमजोर पड़ा था। ऐसे मामलों में जहाँ तकनीकी सबूत उपलब्ध नहीं होते, आरोपियों तक पहुँचने में देरी होती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए अब पुरानी प्रणाली को दुरुस्त कर उसके साथ आधुनिक निगरानी का संयोजन करने का निर्णय लिया गया है।
हालाँकि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद कुछ चिंताएँ भी सामने आई हैं, जैसे कि हवलदारों और कांस्टेबलों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ना, थानों के आंतरिक कामकाज पर दबाव पड़ेगा या नहीं, यह एक अहम सवाल है। फिर भी पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लगातार गश्त और संपर्क से अपराधियों में भय पैदा होगा और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
इस प्रकार, बिलासपुर में पुनः सख्त पुलिसिंग और नियमित बीट गश्त की शुरुआत से इलाके में कानून व्यवस्था को सुधारने और जनता को सुरक्षित महसूस कराने के प्रयास को बल मिला है।
