छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने हाल ही में अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा साझा किया है, जिसमें राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक समावेशी, मजबूत और लोगों के लिए सुलभ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 4500 करोड़ रुपये के मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की है। इसका उद्देश्य है कि आम जनता, विशेष रूप से गरीब, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा का लाभ बिना किसी आर्थिक बोझ के उठा सकें। इस योजना के तहत मरीजों को इलाज के खर्च से मुक्त रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य-संबंधी आर्थिक संकट को कम किया जा सके।
मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में लगभग 1600 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की गई है, जिसमे डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य सहायक स्टाफ की भर्ती शामिल है। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की कार्यकुशलता में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी व्यापक रूप से बढ़ी है।
इसके अलावा, प्रदेश में 30 से अधिक नए स्वास्थ्य केंद्रों को स्वीकृति दी गई है। इन केंद्रों के बनने से प्राथमिक और आवश्यक चिकित्सा सेवाएं लोगों तक और आसानी से पहुँच सकेंगी। यह कदम ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के विस्तार और अधिक बेहतर प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्री श्याम बिहारी ने यह भी कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता दूरस्थ, जनजातीय और पिछड़े इलाकों में गुणवत्ता-समयबद्ध स्वास्थ्य सेवा की पहुंच सुनिश्चित करना है, और इसके लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट, आपातकालीन सेवाओं और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
इन पहलों से यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए राज्य सरकार ने न केवल वित्तीय संसाधनों का समुचित उपयोग किया है, बल्कि लोगों की स्वास्थ्य-सुरक्षा के लिए ठोस कदम भी उठाए हैं। इस दिशा में किए गए प्रयासों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है — खासकर उन इलाकों में जहां पहले स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या थी।
