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October 26, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“धान की बंपर खरीद पर संकट: गोदाम भरे, बाजार सूने, खरीदार नदारद”

छत्तीसगढ़ में इस साल समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड मात्रा में धान की खरीद हुई है। लेकिन अब वही उपलब्धि राज्य के लिए चुनौती बन गई है। गोदामों में लाखों मीट्रिक टन धान भरा पड़ा है, लेकिन इसे खरीदने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा। इससे सरकार पर भारी आर्थिक और प्रबंधन से जुड़ा दबाव बन गया है।

वर्तमान स्थिति:

राज्य के भंडारण केंद्रों में 33 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान मौजूद है। अब तक 15 लाख मीट्रिक टन धान की ही नीलामी हो सकी है, जबकि 18 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा अभी भी बिना खरीदारों के पड़ा हुआ है। धान की इस बड़ी मात्रा का कोई ठोस उपयोग नहीं हो पाने से भंडारण की समस्या के साथ-साथ धन की वापसी भी रुक गई है।

भंडारण और वितरण में असंतुलन:

नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई जैसी संस्थाओं ने सीमित मात्रा में ही खरीदी की है। एफसीआई को इस बार 71 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अभी तक 15.81 लाख मीट्रिक टन ही जमा हो पाया है। वितरण तंत्र में यह असंतुलन अब राज्य की नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहा है।

गुणवत्ता हानि और नुकसान का खतरा:

अगर जल्द ही खरीदी की कोई व्यवस्था नहीं बनी, तो लंबे समय तक भंडारण से धान की गुणवत्ता खराब हो सकती है। खराब अनाज न तो वितरण योग्य रहेगा और न ही व्यापार में काम आ पाएगा। इससे राज्य को करोड़ों रुपये का घाटा हो सकता है।

 

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