महाराष्ट्र के सांगली जिले की यह घटना पूरे देश को झकझोर देने वाली है, जहाँ एक पिता ने सिर्फ कम टेस्ट नंबर आने पर अपनी ही बेटी की जान ले ली। यह बेटी, 17 वर्षीय साधना भोसलें, मेडिकल की प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई में तेज, 10वीं में 92.6% अंक लाने वाली साधना पर उसके पिता की अपेक्षाएँ बहुत अधिक थीं।
घटना अटपाडी तहसील के नेलकर्णजी गाँव की है। साधना ने हाल ही में एक टेस्ट में कम अंक प्राप्त किए थे, जिससे उसके पिता धोंडीराम भोसलें, जो स्वयं एक स्कूल के प्रिंसिपल हैं, बुरी तरह नाराज हो गए। गुस्से में उन्होंने बेटी की डंडों और लकड़ी के ग्राइंडर हत्थे से बेरहमी से पिटाई कर दी।
घटना के बाद साधना को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सिर में आई गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। यह सब तब हुआ जब परिवार ने भविष्य के सपनों के बोझ को इतना बड़ा बना दिया कि एक छोटी सी असफलता जानलेवा साबित हुई।
साधना की मां ने अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपी पिता को हत्या के आरोप (IPC 302) में गिरफ्तार कर लिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
इस घटना ने समाज में चल रहे शैक्षणिक दबाव, पेरेंटिंग में बढ़ती कठोरता, और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा जैसे मुद्दों को उजागर कर दिया है। कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं के इस युग में यह सवाल अब ज़रूरी हो गया है कि बच्चों की सफलता की दौड़ में हम उनके जीवन और संवेदनाओं को कितनी जगह दे रहे हैं?
