इंदौर-देवास रोड पर अर्जुन बड़ौद के पास करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे हिस्से में लगातार जाम की स्थिति बनी रही। भारी वाहन, निर्माण कार्य और अतिक्रमण के चलते रास्ता इतना बाधित हो गया कि घंटों तक गाड़ियां टस से मस नहीं हुईं। इसी बीच एक एम्बुलेंस इमरजेंसी मरीज को लेकर अस्पताल की ओर बढ़ रही थी, पर उसे बार-बार रुकना पड़ा। अंततः जब कोई रास्ता नहीं खुला, तो मजबूर होकर एम्बुलेंस को पीछे लौटना पड़ा।
प्रभावित इलाके और आम जन की परेशानी:
सिर्फ अर्जुन बड़ौद ही नहीं, बल्कि उज्जैन रोड की तरफ भी हालात कम खराब नहीं थे। गाड़ियों की लंबी कतारें, बेतरतीब ट्रैफिक और लाचार मुसाफिर—हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल रहा। कुछ लोग तो कई किलोमीटर पैदल चलकर अपने गंतव्य तक पहुंचे। बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को भारी परेशानी हुई।
मुख्य कारण:
इस गंभीर स्थिति के पीछे कई वजहें हैं — अधूरी सड़क मरम्मत, बेतरतीब पार्किंग, भारी वाहनों का अनियंत्रित आवागमन और ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद प्रशासन की ओर से तत्काल कोई राहत इंतजाम नहीं किया गया।
प्रश्नचिह्न और चिंता:
एम्बुलेंस जैसी सेवाओं का रुक जाना व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि समय पर इलाज न मिल पाने से किसी मरीज की जान चली जाती है, तो क्या यह केवल ‘जाम’ कहलाएगा, या ‘हत्या जैसा अपराध’? क्या ट्रैफिक प्लानिंग और इमरजेंसी रूट की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए?
