रायपुर। वन क्षेत्रों में काम करने वाले तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए एक बार फिर राहत और सम्मान का संदेश आया है। ‘चरण पादुका योजना’ को राज्य सरकार द्वारा पुनः शुरू किया गया है। इस योजना का उद्देश्य है — जंगल में पत्ते तोड़ने के दौरान आदिवासी मजदूरों के पैरों की सुरक्षा, ताकि वे नंगे पांव कांटों और पत्थरों से घायल न हों।
क्या है ‘चरण पादुका योजना’?
यह योजना मुख्य रूप से तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले मजदूरों को जूते-चप्पल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए है। पहली बार यह योजना वर्ष 2011 में शुरू हुई थी, लेकिन समय के साथ यह प्रशासनिक उपेक्षा में चली गई। अब पुनः इसकी शुरुआत से आदिवासी मजदूरों के चेहरे पर खुशी और राहत दोनों लौट आई है।
योजना की मुख्य बातें
- लाभार्थी -लगभग 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक
- वितरित सामग्री -चप्पल, पानी की बोतल, तौलिया, फर्स्ट ऐड किट
- कार्य क्षेत्र -छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा के वन क्षेत्र
- उद्देश्य – संग्रहण के दौरान सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना |
सरकारी बयान: सिर्फ योजना नहीं, सम्मान की पहल
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा,
“हमारे तेंदूपत्ता संग्राहक जंगल की धूप, कांटों और कीड़ों के बीच पत्ते इकट्ठा करते हैं। चरण पादुका योजना सिर्फ एक जूते की योजना नहीं, बल्कि उनके श्रम का सम्मान है।”
योजना का सामाजिक महत्व
यह योजना न सिर्फ भौतिक सुरक्षा देती है, बल्कि संग्राहकों को यह विश्वास भी दिलाती है कि राज्य उनके साथ है। महिलाओं और बुजुर्ग संग्राहकों को विशेष प्राथमिकता के साथ किट वितरित किए जाएंगे। साथ ही, योजना को डिजिटल पोर्टल से जोड़ा जा रहा है ताकि हर लाभार्थी तक उसकी जानकारी समय पर पहुंचे।
योजना के पुनः शुभारंभ पर क्या हुआ?
मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश स्तर पर योजना की घोषणा की गई।सैकड़ों संग्राहकों को मंच पर बुलाकर किट भेंट की गई, साथ ही उनके अनुभव भी सुने गए।योजना के प्रथम चरण में लगभग 2 लाख किट वितरित की जाएंगी।
