6-7 जुलाई 2025 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, इंडोनेशिया) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी, जिसे भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित बताया। BRICS ने अपनी “रियो डी जनेरियो डिक्लेरेशन” में आतंकवाद को “आपराधिक और अक्षम्य” करार दिया और सीमा-पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग, और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शांति और सुरक्षा’ सत्र में कहा, “पहलगाम का कायरतापूर्ण हमला न केवल भारत पर, बल्कि पूरी मानवता पर आघात है। आतंकवाद की निंदा हमारा सिद्धांत होना चाहिए, न कि सुविधा।” उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से चीन पर निशाना साधा, जो संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकियों को आतंकी घोषित करने में बाधा डालता रहा है। मोदी ने कहा, “आतंकवाद का समर्थन, चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं।”
BRICS की प्रतिबद्धता:
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आतंकवाद विरोधी सहयोग: BRICS ने अपने काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) और इसके पांच उप-समूहों की गतिविधियों का स्वागत किया।
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UN प्रस्ताव: भारत द्वारा प्रस्तावित ‘कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म’ को जल्द अंतिम रूप देने की मांग।
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जीरो टॉलरेंस: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या नस्ल से जोड़ने के खिलाफ चेतावनी दी और सभी UN-प्रतिबंधित आतंकियों और संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही।
BRICS शिखर सम्मेलन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 7 जुलाई 2025 को अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर BRICS देशों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश BRICS की “अमेरिका-विरोधी नीतियों” के साथ जुड़ता है, तो उसे अमेरिका में आयात पर 10% अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ट्रम्प ने पहले भी BRICS देशों को 100% टैरिफ की धमकी दी थी, अगर वे अमेरिकी डॉलर को वैश्विक व्यापार में चुनौती देने की कोशिश करेंगे।
ट्रम्प की धमकी का मकसद:
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डॉलर का दबदबा: ट्रम्प ने कहा, “BRICS देश अगर नई मुद्रा बनाते हैं या डॉलर को हटाने की कोशिश करते हैं, तो वे अमेरिकी बाजार से बाहर होंगे।” यह धमकी इसलिए है क्योंकि रूस और ईरान जैसे देश SWIFT सिस्टम से बाहर होने के बाद स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं।
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भारत पर असर: भारत, जो अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इस धमकी से प्रभावित हो सकता है। 2022 में भारत ने रूस के साथ रुपये में व्यापार शुरू किया था, जिसे ट्रम्प “डॉलर-विरोधी” मान सकते हैं।
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BRICS की प्रतिक्रिया: रियो डी जनेरियो डिक्लेरेशन में BRICS ने बिना अमेरिका का नाम लिए “अवैध और मनमाने” टैरिफ की निंदा की, जो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं। BRICS ने WTO-आधारित, पारदर्शी और समावेशी व्यापार प्रणाली का समर्थन किया।
भारत की स्थिति:
भारत ने साफ किया कि BRICS में साझा मुद्रा बनाने की कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “BRICS सर्वसम्मति से निर्णय लेता है। हमारी नीति डॉलर को चुनौती देने की नहीं है।” भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत को तेज कर रहा है ताकि टैरिफ के जोखिम को कम किया जा सके।
