July 23, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

‘परख’ रिपोर्ट में शिक्षा की सच्चाई उजागर: बच्चों को नहीं याद पहाड़ा, रायपुर 26वें स्थान पर फिसला

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करने वाली ‘परख’ रिपोर्ट ने प्रदेश के नीति-निर्माताओं और अभिभावकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह रिपोर्ट बताती है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सीखने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। न केवल गणित और भाषा में, बल्कि बच्चों की सामान्य समझ में भी कमी पाई गई है।

मुख्य बिंदु:

1. गणित की कमजोर पकड़:

रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के 50% से अधिक छात्र कक्षा 2 से 10 तक का पहाड़ा तक याद नहीं कर पाते। वहीं कक्षा 3 में पढ़ने वाले 45% बच्चे 99 तक की गिनती को सही क्रम में नहीं रख सकते।

2. SC छात्रों की शिक्षा में गिरावट:

अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों की स्थिति अन्य वर्गों के मुकाबले ज्यादा कमजोर पाई गई है, खासकर भाषा, गणित और आसपास की दुनिया को समझने के मामले में।

3. ग्रामीण बनाम शहरी छात्र:

ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भाषा के मामले में शहरी छात्रों से बेहतर पाए गए, लेकिन तकनीकी और अभिव्यक्ति क्षमता में शहरी छात्रों की गणना तेज थी। ग्रामीण छात्र अपने परिवेश को अधिक अच्छी तरह से समझते हैं।

4. सरकारी स्कूलों की सकारात्मक तस्वीर:

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्कूलों के छात्र निजी स्कूलों के छात्रों से कई विषयों में आगे निकले हैं, विशेष रूप से भाषा और पर्यावरण विषय में।

5. रायपुर समेत अन्य जिलों की रैंकिंग:

राज्य की राजधानी रायपुर को ‘परख’ रिपोर्ट में देश की टॉप 50 परफॉर्मिंग सिटीज में 26वां स्थान मिला है, जो चिंताजनक है।

वहीं सुकमा 10वें, नारायणपुर 20वें और कोरबा 45वें स्थान पर रहा, जो यह दिखाता है कि छोटे जिलों में भी शिक्षा की स्थिति गंभीर है।

मुख्य समस्याएं:

प्राथमिक शिक्षा में बुनियादी समझ की कमी

अभ्यास और पढ़ने की आदत में गिरावट

तकनीकी संसाधनों और शिक्षक प्रशिक्षण की कमी

सामाजिक-सांस्कृतिक अवरोध

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