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September 6, 2026
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छत्तीसगढ़

सुप्रीम कोर्ट का छत्तीसगढ़ सरकार को अल्टीमेटम: 2 महीने में बनाएं भूमि-अधिग्रहण प्राधिकरण, नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए दो महीने के भीतर भूमि-अधिग्रहण प्राधिकरण गठन करने का आदेश दिया है। यह प्राधिकरण 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम के तहत मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े विवादों का निपटारा करेगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर तय समय में आदेश का पालन नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

क्या है मामला?

यह आदेश एक याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 2013 के अधिनियम के प्रावधानों का पालन न करने की शिकायत की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण का गठन न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि यह प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी है।

क्यों अहम है यह फैसला?

छत्तीसगढ़ में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कई मामले लंबित हैं, जिनमें किसानों और प्रभावित पक्षों को मुआवजा देने में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। प्राधिकरण के गठन से इन विवादों का तेजी से निपटारा होने की उम्मीद है। कोर्ट का यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने अभी तक इस आदेश पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि संबंधित विभाग जल्द ही प्राधिकरण गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि समयसीमा के भीतर इस आदेश का पालन करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले पर कड़ी नजर रखेगा। यदि सरकार दो महीने में प्राधिकरण का गठन नहीं करती, तो कोर्ट के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। प्रभावित पक्षों को उम्मीद है कि यह फैसला उनके हक में न्याय सुनिश्चित करेगा।

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