बिलासपुर नगर निगम एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला नक्शों की अवैध मंजूरी से जुड़ा है, जहां विकास सिंह नामक व्यक्ति के नाम पर 400 से अधिक नक्शों को मंजूरी दिए जाने का खुलासा हुआ है। यह संख्या न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि इसके पीछे संभावित मिलीभगत और भ्रष्टाचार की भी आशंका जताई जा रही है।
प्रश्न यह उठता है कि क्या वाकई एक ही व्यक्ति के नाम पर इतने अधिक नक्शे पास करना संभव है? यदि नहीं, तो फिर किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई और किसने इस अनियमितता को अंजाम दिया? नगर निगम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की जवाबदेही और पारदर्शिता इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है।
स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई नक्शों में जरूरी दस्तावेज अधूरे या फर्जी बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन नक्शों को मंजूरी मिलना, नगर निगम के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। आम जनता का विश्वास ऐसे मामलों से टूटता है, क्योंकि जिन संस्थाओं से न्याय और नियम की उम्मीद की जाती है, वे खुद ही अनियमितता में लिप्त नजर आती हैं।
शहर में इस घोटाले को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन और आवाज़ उठाई जा रही है। सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
