नई दिल्ली। लद्दाख में लंबे समय से चल रही राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग बुधवार को हिंसक रूप ले ली। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अचानक स्थिति बिगड़ गई और प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें 30 पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ जवान भी शामिल हैं। हिंसा के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है।
घटना के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस हिंसा के पीछे कांग्रेस की साजिश का आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस की यह सोची-समझी रणनीति है जिसका उद्देश्य देश में अस्थिरता फैलाना है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने जानबूझकर इस आंदोलन को हिंसक मोड़ दिया, ताकि लद्दाख में अराजक स्थिति पैदा की जा सके।
पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार युवाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं और देश को बांटने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की विचारधारा भारत विरोधी ताकतों के हित में काम कर रही है और “भारत तेरे टुकड़े होंगे” जैसे नारे इसी सोच का हिस्सा हैं। पात्रा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी और विदेशी एजेंट जॉर्ज सोरोस मिलकर देश को अस्थिर करने की साजिश कर रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि लेह में कांग्रेस पार्षद ने भीड़ को उकसाया और हथियारों से लैस लोगों को भाजपा कार्यालय की ओर भेजा गया। उन्होंने हिंसा की तस्वीरें और वीडियो फुटेज भी जारी किए और कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने जनता को गुमराह कर माहौल खराब किया।
वहीं, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का अब तक कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लद्दाख में राज्य के दर्जे की मांग लंबे समय से चली आ रही है, और केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
फिलहाल लद्दाख में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। शांति बहाली के प्रयास जारी हैं।
