भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पर उपभोक्ता अदालत ने ₹2.5 लाख का जुर्माना लगाया है। कारण यह रहा कि बैंक ने एक ग्राहक द्वारा होम लोन का पूरा भुगतान करने के बावजूद उसकी प्रॉपर्टी से संबंधित मूल दस्तावेज समय पर वापस नहीं किए। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों के स्पष्ट उल्लंघन से जुड़ा है और बैंकिंग प्रणाली में लापरवाही का एक और उदाहरण बन गया है।
दरअसल, एक व्यक्ति ने एसबीआई से मकान खरीदने के लिए होम लोन लिया था। कई वर्षों तक किस्तें चुकाने के बाद जब उस व्यक्ति ने लोन पूरी तरह चुका दिया, तो बैंक से दस्तावेज वापस मांगे। लेकिन बार-बार अनुरोध और समय बीत जाने के बाद भी बैंक ने दस्तावेज लौटाने में टालमटोल की।
थक-हारकर ग्राहक ने उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में शिकायत दर्ज करवाई। मामले की सुनवाई के दौरान फोरम ने माना कि दस्तावेज लौटाने में देरी करना बैंक की अनुचित सेवा और लापरवाही है। यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने बैंक को दोषी ठहराते हुए ₹2.5 लाख का जुर्माना लगाया और कहा कि बैंक जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहक की वित्तीय स्वतंत्रता और विश्वास का सम्मान करें। दस्तावेज समय पर लौटाना एक कानूनी और नैतिक दायित्व है।
यह फैसला न केवल उस पीड़ित ग्राहक को न्याय देने वाला है, बल्कि पूरे देश के लोन लेने वालों (borrowers) के लिए एक जागरूकता और चेतावनी भी है कि अगर बैंक उनके अधिकारों का हनन करते हैं, तो वे कानूनी रास्ता अपनाकर न्याय पा सकते हैं।
