2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने राज्यवार ऑब्जर्वर (प्रेक्षक) तैनात करना शुरू कर दिया है। इसमें खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ से 4 बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जा रहे हैं।
कौन-कौन हैं CG के ऑब्जर्वर?
अमरजीत भगत – छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री। जमीनी पकड़ और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं।
2. शैलेश पांडेय – बिलासपुर से पूर्व विधायक, युवा और आक्रामक शैली के कारण पहचान। चुनाव प्रबंधन में तेज।
3. बद्री पांडेय – लंबे समय से संगठन से जुड़े, कार्यकर्ताओं के बीच पैठ।
4. अभय नारायण राय – युवा चेहरा, बिहार मूल, कार्यकर्ता संपर्क और सोशल मीडिया के मोर्चे पर मजबूत।
कुल कितने बनाए गए हैं ऑब्जर्वर?
कांग्रेस ने बिहार के अलग-अलग जिलों में कुल 58 ऑब्जर्वर तैनात किए हैं।
सभी नेताओं को जमीनी रिपोर्टिंग, बूथ मैनेजमेंट और रणनीतिक तैयारियों की जिम्मेदारी दी गई है।
क्यों जरूरी हैं ऑब्जर्वर?
जमीनी फीडबैक पार्टी हाईकमान तक पहुंचाना
कार्यकर्ताओं के भीतर नई ऊर्जा भरना
गठबंधन और प्रत्याशी चयन की प्राथमिक रिपोर्ट तैयार करना
विपक्ष की रणनीति का मूल्यांकन करना
क्यों खास है छत्तीसगढ़ से टीम भेजना?
- छत्तीसगढ़ कांग्रेस, देशभर में संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी रणनीति के लिए जानी जाती है।
- भूपेश बघेल सरकार के शासनकाल में संगठन मज़बूत हुआ
- 2018 में शानदार जीत और प्रशासनिक अनुभव
- कार्यकर्ताओं की लगातार ट्रेनिंग, जमीनी पकड़
- यही अनुभव अब कांग्रेस बिहार में दोहराना चाहती है
कांग्रेस की रणनीति क्या दिख रही है?
2020 में महागठबंधन की हार से सीख लेकर कांग्रेस अब फील्ड ऑब्जर्वेशन पर जोर दे रही है।
हर जिले में स्थानीय और बाहरी नेताओं की जोड़-तोड़ से एक नई टीम बनाई जा रही है।
खासकर छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड जैसे कांग्रेस शासित या मजबूत राज्यों से अनुभवी नेताओं को भेजा जा रहा है, ताकि बिहार के कमजोर संगठन को मज़बूती मिल सके।
