बिहार: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान शनिवार को बिहार के कटिहार जिले (कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र) पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों से मुलाकात की। सुबह वे सीधे मखाना के तालाब में उतर गए। किसानों के साथ बैठकर मखाना तोड़ा और बनाने की पूरी मेकिंग प्रोसेस सीखी। इसके बाद पास के कारखाने में जाकर मखाने को फोड़ने और प्रोसेस करने का तरीका भी समझा।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“बिहार दुनिया का 90% मखाना पैदा करता है, लेकिन यहां के मेहनती किसान और मजदूर मुनाफ़े का 1% भी नहीं कमा पाते।” बड़े शहरों में 1000–2000 रुपए किलो बिकने वाला मखाना किसानों को बेहद कम दाम पर बेचना पड़ता है।” “पूरी मेहनत दलित-बहुजन और पिछड़े किसान करते हैं, पर असली फायदा बिचौलियों का होता है। वोट चोर सरकार न उनकी कदर करती है, न फिक्र; न आय, न न्याय।”
किसानों ने क्या कहा?
किसानों ने बताया कि मखाना की खेती बेहद मेहनत और जोखिम वाला काम है।
“हम लोग तालाब में घंटों खड़े रहते हैं, हाथ-पैर कट जाते हैं, कीचड़ और पानी में संघर्ष करते हैं। लेकिन जब फसल बिकती है तो उसका फायदा बाजार में बैठे व्यापारी उठा ले जाते हैं।” किसानों का कहना है कि सरकार ने अब तक कोई ठोस सपोर्ट प्राइस (MSP) तय नहीं किया है। किसान चाहते हैं कि मखाना को भी धान और गेहूं की तरह सरकारी खरीद में शामिल किया जाए।
क्यों खास है मखाना?
मखाना (फॉक्स नट) बिहार का GI टैग (भौगोलिक संकेतक) प्राप्त उत्पाद है। दुनिया का करीब 90% मखाना उत्पादन बिहार में होता है। कटिहार, दरभंगा, पूर्णिया और मधुबनी इसके प्रमुख उत्पादन क्षेत्र हैं। मखाना का वैश्विक बाजार तेजी से बढ़ रहा है और हेल्थ फूड के रूप में इसकी डिमांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है।
राजनीतिक मायने
राहुल गांधी इस दौरे में किसानों और मजदूरों के बीच सीधा संपर्क बना रहे हैं। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जनता से जुड़ाव और किसानों-मजदूरों के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस में लाना है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने किसानों की आर्थिक बदहाली और शोषण का मुद्दा उठाया। बिहार विधानसभा चुनाव और आगे लोकसभा चुनाव में इस तरह की यात्राएं कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।
