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October 21, 2026
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पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापन पर हाईकोर्ट की रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के एक च्यवनप्राश विज्ञापन पर रोक लगा दी है। यह निर्णय तब आया जब डाबर इंडिया लिमिटेड ने अदालत में याचिका दायर कर यह आरोप लगाया कि पतंजलि के विज्ञापन में उनके उत्पाद को नीचा दिखाया जा रहा है और इससे उनकी ब्रांड छवि को नुकसान पहुँच रहा है।

डाबर ने कोर्ट में दलील दी कि उनका च्यवनप्राश एक प्रतिष्ठित और वर्षों से चला आ रहा आयुर्वेदिक उत्पाद है, जिसे वैज्ञानिक प्रक्रिया और पारंपरिक जड़ी-बूटियों के साथ तैयार किया जाता है। ऐसे में पतंजलि द्वारा चलाए जा रहे विज्ञापन, जिसमें अन्य कंपनियों के उत्पादों को अप्रत्यक्ष रूप से कमज़ोर और नकली बताया जा रहा है, भ्रामक और अनुचित हैं। डाबर का कहना है कि यह न केवल उनकी बिक्री को प्रभावित कर रहा है बल्कि उपभोक्ताओं में भ्रम भी पैदा कर रहा है।

अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल पतंजलि को ऐसे किसी भी विज्ञापन के प्रसारण से रोक दिया है जो अन्य ब्रांड्स को नुकसान पहुँचाता हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखना आवश्यक है।

यह मामला भारत में FMCG सेक्टर में बढ़ती ब्रांड प्रतिस्पर्धा और विज्ञापनों की नैतिकता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। इससे यह संकेत मिला है कि कंपनियों को प्रचार में भी संयम और सम्मानजनक भाषा का उपयोग करना चाहिए।

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