त्रिनिदाद एंड टोबैगो/नई दिल्ली | 3 जुलाई 2025 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का त्रिनिदाद दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि भावनाओं और इतिहास से जुड़ी एक आत्मिक यात्रा बन गई। जहां कभी भारत के गांवों से लोगों को गिरमिटिया मजदूर बनाकर ले जाया गया था, वहीं आज उनके वंशज देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हैं।
मोदी ने कहा—
1838 में भारत के जिन लोगों को मजबूरी में इस धरती पर लाया गया था, आज उनकी संतानों ने इतिहास बदल दिया है। यह भारत के संस्कारों की ताकत है।”
गिरमिटिया इतिहास की पृष्ठभूमि:
- 1838 में ब्रिटिश शासन के तहत पहले गिरमिटिया मजदूर त्रिनिदाद पहुंचे थे।
- ये मजदूर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड जैसे इलाकों से थे।
- इन्हें गन्ने के खेतों में बंधुआ मजदूरी के लिए लाया गया था।
भारतवंशी अब बना रहे भविष्य:
- त्रिनिदाद की 40% जनसंख्या भारतीय मूल की है।
- वर्तमान राष्ट्रपति कविता रामचरण और प्रधानमंत्री सत्येश शर्मा दोनों भारतीय मूल के हैं।
- वहां की संसद में आधे से ज्यादा सांसद भारतवंशी हैं।
मोदी का दौरा: भावनात्मक जुड़ाव से रणनीतिक साझेदारी तक
प्रमुख कार्यक्रम विवरण
- भारतीय समुदाय को संबोधन गिरमिटिया वंशजों से मुलाकात
- मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा गंगा धारा हनुमान मंदिर, गिरमिट घाट
- द्विपक्षीय समझौते शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य
सांस्कृतिक समागम:
रामलीला, छठ गीत, और भोजपुरी लोकनृत्य से स्वागत
मोदी ने कहा- “त्रिनिदाद में भारत की आत्मा ज़िंदा है”
भारत भवन में ‘गिरमिटिया संग्रहालय’ में मोदी ने दीप प्रज्वलित किया
क्यों ऐतिहासिक है ये दौरा?
पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने गिरमिटिया इतिहास को केंद्र में रखकर कैरेबियन देश का दौरा किया।सॉफ्ट डिप्लोमेसी के ज़रिए भारतवंशियों के दिल में फिर से गूंजी ‘भारत की पुकार’
