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April 16, 2026
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छत्तीसगढ़

दोंदे खुर्द में शराब दुकान के खिलाफ 17वां दिन: ग्रामीणों का धरना जारी, विधायक के वादे खोखले, प्रशासन की चुप्पी बरकरार

रायपुर, 13 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के दोंदे खुर्द गांव में नई शराब दुकान के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है। अंबेडकर चौक पर ग्रामीण, खासकर महिलाएं, तख्तियां लेकर धरने पर बैठे हैं, और उनका गुस्सा सरकार व प्रशासन के खिलाफ बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब दुकान गांव की शांति और सामाजिक ढांचे को नष्ट कर रही है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

प्रदर्शन की शुरुआत और मांग:

दोंदे खुर्द में शराब दुकान खोलने का प्रस्ताव आने के बाद ग्रामीणों ने संघर्ष समिति बनाकर विरोध शुरू किया। 2013 में भी गांव ने एकजुट होकर शराब दुकान बंद करवाई थी, जिसके बाद यह गांव 12 साल तक शराब मुक्त रहा। ग्रामीणों ने तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें शराब दुकान को तत्काल बंद करने की मांग की गई। महिलाओं ने “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि शराब दुकान खोलना इस मिशन के खिलाफ है।

विधायक का आश्वासन, प्रशासन का मौन:

स्थानीय विधायक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन 17 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच अशोक साहू की सहमति से यह दुकान खोली जा रही है, जबकि आसपास के गांवों जैसे छपोरा, लालपुर, सेमरिया और मटिया ने इसे खोलने की अनुमति नहीं दी। प्रशासन की चुप्पी से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दुकान बंद नहीं हुई, तो वे चक्काजाम और विधानसभा घेराव करेंगे।

सद्बुद्धि यज्ञ और सामाजिक समर्थन:

विरोध को और प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीणों ने अनोखा कदम उठाते हुए सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सतनामी समाज सहित आसपास के दर्जन गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। सतनामी समाज ने इस आंदोलन को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी। पूर्व विधायक अनिता शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष उधो वर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गेश वर्मा और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन जताया। अनिता शर्मा ने कहा, “जब गांव ने अवैध शराब के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब नई दुकान खोलना अन्याय है।”

ग्रामीणों का तर्क:

ग्रामीणों का कहना है कि शराब दुकान से न केवल सामाजिक माहौल खराब हो रहा है, बल्कि बच्चों और महिलाओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। गीता गुप्ता, एक स्थानीय निवासी, ने बताया, “हमने 12 साल तक गांव को शराब मुक्त रखा। अब सरकार इसे फिर से नशे की ओर धकेल रही है।” ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दुकान को गांव से बाहर स्थानांतरित किया जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज होगा।

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