भारत में नौकरशाही को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं, लेकिन जब प्रमोशन जैसे अहम फैसले भी पैसे और सिफारिश के आधार पर हों, तो पूरी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। छत्तीसगढ़ में तहसीलदार प्रमोशन घोटाला ऐसा ही एक गंभीर मामला बनकर सामने आया है।
घटना का सार:
छत्तीसगढ़ में तहसीलदारों की पदोन्नति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी के संकेत मिले हैं। एक वायरल वाट्सऐप चैट में ‘नारियल’ नाम के कोड का उपयोग करके घूस लेने की बात कही गई है। इसमें 50% की पहली किश्त की डिलीवरी और सीनियर अधिकारियों तक कमीशन पहुंचाने के दावे भी सामने आए हैं।
चैट में एक व्यक्ति लिखता है, “प्रसाद चढ़ाकर फतह हासिल कर लेते हैं,” जिससे यह साफ हो जाता है कि पैसे देकर प्रमोशन सुनिश्चित किया जा रहा है। यह भी उल्लेख किया गया कि “सवंत्री का 3% कहाँ पहुँचा”, जो दर्शाता है कि इस घोटाले में कई लोग शामिल हो सकते हैं।
प्रभाव:
इस तरह की घटनाओं से केवल प्रशासनिक तंत्र की साख ही नहीं गिरती, बल्कि योग्य अधिकारियों के हक मारे जाते हैं। भ्रष्टाचार का यह जाल यदि जड़ से नहीं उखाड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ी में भी यह संदेश जाएगा कि मेहनत से ज्यादा महत्व पैसे और जुगाड़ का है।
